सीरवी समाज - ब्लॉग

Result : 1 - 15 of 120   Total 8 pages
Posted By : Posted By Raju Seervi on 29 Jul 2022, 05:47:58
मेरे प्यारे भाईयों एवं बहनों
सादर जय श्री आईमाताजी की।

सीरवी समाज डॉट कॉम वेबसाइट की और से आप सभी का हार्दिक स्वागत एंव अभिनंदन है। सर्वप्रथम आप सभी सीरवी भाईयों और बहनों को स्वतंत्रता दिवस, रक्षाबंधन एवं जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें 
स्नेहवाहिनी, शक्तिदायिनी, मनभावनी पावन राखी में पवित्रता का प्रकाश और रूहानियत का तेज समाया हैं। सारे विश्व को भाई-भाई की भावना से जोड़ने वाले इस पर्व का स्वागत प्रकृति भी अपनी शीतल फुहारों हरीतिमा से ढकी धरती और मोर के नृत्य के साथ करती है। 
आज के समाज में होने वाले चुनाव के परिप्रेक्ष्य में सही मायने में यदि देखा जाए तो समाज में चुनाव की जगह चयन प्रक्रिया, सर्वसम्मति से की जाए तो संगठन में किसी भी तरह का गतिरोध, आपसी वैमनस्यता, मनमुटाव पैदा ही नहीं होगा।
तहसील सभाओं, जिला सभाओं, प्रदेश सभाओं, इत्यादि के चुनाव के दौरान एक बहुत ही अजीब-सी स्थिति देखने को मिलती है कि वह यह कि मुझे संगठन में यह पद चाहिए, मुझे यहां नहीं मुझे वहां जाना है, यह पद या जिम्मेदारी मुझे नहीं दी गई तो मैं देख लूंगा आदि-आदि ! इस प्रकार ..
Posted By : Posted By Raju Seervi on 18 Jul 2022, 14:28:33
आज समाज के छोटे-मध्यम परिवार के लिए लड़कों की शादी कराना बहुत मुश्किल काम हो गया : मनोहर सीरवी

समाज को गंभीरता से सोचना होगा-आज समाज के छोटे-मध्यम परिवार के लिए लड़कों की शादी कराना बहुत मुश्किल काम हो गया है। खासकर मध्यम वर्ग और छोटे शहरों के परिवारों की हालत तो बहुत दयनीय होती जा रही है। लड़के 30-32 वर्ष की उम्र पार कर जा रहे है, मगर रिश्ते आ नहीं रहे और इसके पीछे मानसिकता सिर्फ महानगरों की भौतिकता और स्वच्छद रहने की लालसा। आज हर बच्ची और उसके माता-पिता अपनी लाड़ली के लिए बड़ा शहर, अकेला लड़का और पढ़ा-लिखा तथा अच्छी नौकरी करने वाला ठिकाना ही चाहते हैं और इसके चलते लड़कियों की भी उम्र बढ़ती जा रही है और फिर कही न कही समझौता करना पड़ता है। समाज को इस समस्या के समाधान के लिए जरूर चिंतन करना होगा। ऐसा नहीं हैं कि समाज में लड़कियों की कमी है, मगर समस्या यही है कि लड़की वालों की अपेक्षाएं बहुत ज्यादा बढ़ गयी हैं। वह यह नहीं समझ रहे कि कल यही समस्या उनके घर के लड़कों को भी आनी है और हर परिवार बड़े शहर जाकर तो नहीं बस सकता और जब कोई परिवार अपने पुश्तैनी गाँव में अच्छा खासा धंधा कर र..
Posted By : Posted By Raju Seervi on 17 Jul 2022, 07:22:55
पारिवारिक रिश्ते बचाने एवं सम्बन्ध मजबूत करने के लिए जरुरी विचार योग्य पहल। बेटी के ससुराल में बेटी के माता-पिता को सामान्य रूप से हस्तक्षेप नहीं करना चाहिये। जिससे  प्रत्येक व्यक्ति को अपनी स्वतंत्रता से जीने का अधिकार है, उसी प्रकार प्रत्येक परिवार को भी अपने घर में अपनी इच्छा से जीने का अधिकार हैं। जैसे एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति के व्यक्तिगत जीवन में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। उसी प्रकार से एक परिवार को दूसरे परिवार की परम्पराओं में भी हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। 
एक ही परिवार में बाप और बेटा दोनों 100% एक समान जीवन नहीं जी सकते क्योंकि दोनों के अपने संस्कार अलग-अलग हैं, रुचि अलग-अलग हैं, इसलिए वे अपने रूचि एवं संस्कार के हिसाब से अपना-अपना जीवन जीते हैं। इसी प्रकार से हर परिवार के संस्कार भी अलग-अलग हैं। अतः एक परिवार को दूसरे परिवार की परम्पराओं में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। 
बेटी, शादी के बाद ससुराल गई। माता-पिता ने वर्षों तक जिस बेटी को पाल-पास कर बड़ा किया हो, उनको उस बेटी से राग-मोह होना तो स्वाभाविक है।  अब माता-पिता..
Posted By : Posted By Raju Seervi on 10 Jul 2022, 00:48:24
व्यक्ति की पहचान

आज के इस आधुनिक युग में कौन व्यक्ति कैसा है, यह पता चलना तो कठिन बात है किन्तु उस व्यक्ति का व्यवहार जिस रूपमें सामने आता हैं, उसके आधार पर व्यक्ति को पहचाना जा सकता हैं। हमारी पहचान का सबसे बड़ा साधन है व्यवहार। हम बाहरी जगत में कैसे प्रकट होते हैं? हमारा आचरण कैसा है? हमारी अभिव्यक्ति कैसी है? हम दूसरों के प्रति पदार्थ के प्रति, व्यक्ति के प्रति कैसा व्यवहार करते हैं? उस व्यवहार में हमारा पूरा व्यक्तित्व झलक जाता हैं। प्रसिद्ध दार्शनिक अरस्तु ने सटीक कहा है - अच्छी शुरुआत से आधा काम हो जाता है। एक आदमी बगीचे के अन्दर चल रहा है और जगह-जगह गन्दगी फैलाता चल रहा है। फूलों को तोड़ रहा है। बिना मतलब पेड़-पौधों, वनस्पति सबको खराब कर रहा है। वहीँ दूसरी और एक व्यक्ति ऐसा भी है जो प्रातः काल घूमता है और उसे जहाँ कहीं कुछ पड़ा दिखाई देता हैं, वह उसे उठाकर मुख्यमार्ग से दूर रख देता है। दो व्यक्ति हैं और दोनों का आचरण भिन्न है। इससे पता चलता है कि व्यक्ति के अंतर्मन में केसी जागरूकता है, और यह व्यक्ति कैसा है। दार्शनिक विलियम शेक्सपियर ने मनुष्य की चेत..
Posted By : Posted By Manohar Seervi on 22 Apr 2022, 14:46:20
नमस्कार

आशा है आप अच्छा कर रहे हैं अपने - अपने क्षेत्र में । परन्तु अच्छा करते-करते अचानक हम उदास हो जाते है क्योंकि हम तुलना कर बैठते हैं। हम जानते हैं कि विश्व के सारे मस्तिष्क एक दूसरे से बिल्कुल अलग अलग हैं। फिर भी हम तुलना कर बैठते है कि फलाँ-फलाँ हमसे बेहतर है और अपने आप को दुखी कर लेते हैं। जो दूसरा बहोत अच्छे से कर सकता है हम अच्छे से नहीं कर पाते हैं और जो हम अच्छे से कर लेते हैं वो दूसरा अच्छे से नहीं कर पाता है। अधिक राम के कंप्यूटर की तुलना क्या कम राम के कंप्यूटर से की जा सकती है? क्या कम C C की गाड़ी अधिक C C की गाड़ी से की जा सकती है? बिल्कुल नहीं! तुलना तो बिल्कुल भी नहीं की जा सकती है। हाँ दोनों को अपनी अपनी जगह पूरा माना जा सकता है। इतनी बात बस ध्यान देने कि भौतिक चीजों की क्षमता निश्चित होती है और इसे बढ़ाया नहीं जा सकता है जबकि हम अपनी क्षमताओं को अभ्यास द्वारा थोड़ा-थोड़ा करके बढ़ा सकते हैं। हो सकता है आपका अभ्यास इतना निरन्तर हो की आपकी क्षमता पहले से दुगुनी या तिगुनी या चौगुनी बढ़ जाये पर यह आपकी खुद की क्षमता से बढ़ी हुई है। इस अधिक हुई क्षमता की तुलन..
Posted By : Posted By Raju Seervi on 09 Feb 2022, 07:33:06
माता पिता की अति महत्वाकांक्षा से 27-28-32 उम्र से अदिक की कुंवारी लड़कियां घर बैठी हैं। अगर अभी भी माँ-बाप नहीं जागे तो स्थितियाँ और विस्फोटक हो सकती है। हमारा समाज आज  बच्चों के  विवाह को लेकर इतना सजग हो गया है कि आपस में रिश्ते ही नहीं हो पा रहे हैं। समाज में आज 27-28-32 उम्र तक की बहुत सी कुँवारी लड़कियाँ घर बैठी है, क्योंकि इनके सपने हैसियत से भी बहुत ज्यादा है इस प्रकार के कई उदाहरण है। ऐसे लोगों के कारण समाज की छवि बहुत ख़राब हो रही है। सबसे बड़ा मानव सुख, सुखी वैवाहिक जीवन होता है। पैसा भी आवश्यक है, लेकिन कुछ हद तक। पैसे की वजह से अच्छे रिश्ते ठुकराना गलत है। पहली प्राथमिकता सुखी संसार व् अच्छा घर-परिवार होना चाहिये। ज्यादा धन के चक्कर में अच्छे रिश्तों को नजर-अंदाज करना गलत है। सपंति खरीदी जा सकती  है लेकिन गुण नहीं। मेरा मानना है कि घर-परिवार और लड़का अच्छा देखें लेकिन ज्यादा के चक्कर में अच्छे रिश्तें हाथ से नहीं जाने दें। सुखी वैवाहिक जीवन जियें। 30 की उम्र के बाद विवाह नहीं होता, समझौता होता है और मेडिकल स्थिति से भी देखा जाए तो उसमें बहुत सी समस्याएँ उत्तप..
Posted By : Posted By गोविन्द सिंह पंवार on 29 Dec 2021, 03:57:43
।।संस्कृति का उत्थान या पतन..!!।।
भारत के महान शायर कवि मुहम्मद इकबाल ने लिखा है कि,
” यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रूमा, सब मिट गए जहाँ से।
अब तक मगर है बाक़ी, नाम-ओ-निशाँ हमारा।।
कुछ बात है कि हस्ती, मिटती नहीं हमारी।
सदियों रहा है दुश्मन, दौर-ए-ज़माँ हमारा।।”
यह भाव हमारी महान सांस्कृतिक विरासत के मूल्यों को अक्षुण्ण रखने में हमारे पुरखो के योगदान की गाथा का सही बखान है जिन्होंने अपनी संस्कृति को मिटने नही दिया। समय के साथ विश्व की प्राचीन सांस्कृतिक विरासतें-यूनान,मिश्र व रोम की संस्कृति मिट गई लेकिन भारतीय संस्कृति को आंच नही आई।जबकि हमारी सांस्कृतिक विरासत को मिट्टी में मिलाने के लिए क्रूर आक्रांताओं और दुश्मनों ने बहुत कोशिश की। विदेशी विधर्मी आक्रांताओं ने हमारी संस्कृति के महान धरोहरों को नष्ट-विनष्ट करने में कोई कसर नही छोड़ी और हमारी महान परम्पराओ पर भी जबर्दस्त चोट की। क्रूर आक्रांताओं ने हमारे पुरखो पर अत्याचार-अनाचार किए,हमारी नारियों पर जघन्य दुष्कृत्य किए और धर्म परिवर्तन का दबाव डाला लेकिन उन्होंने अपनी वीरता और बुद्धिमता से संस्कृ..
Posted By : Posted By गोविन्द सिंह पंवार on 02 Nov 2021, 01:49:13
मेरे प्यारे भाईयों एवं बहनों
सादर जय श्री आईमाताजी की।

सीरवी समाज डॉट कॉम वेबसाइट की और से आप सभी का हार्दिक स्वागत एंव अभिनंदन है। सर्वप्रथम आप सभी सीरवी भाईयों और बहनों को दीपावली एवं भाई दूज की हार्दिक शुभकामनायें देते हुए माँ लक्ष्मी एवं भगवान गणपति से प्राथना करते हैं कि ज्योति पर्व दीपावली आपके जीवन में आनन्द एवं मंगल के अगणित दीप जलाता रहे। देवी लक्ष्मी एवं भगवान श्री गणेश जी कृपा से आपका घर रिद्धि-सिद्धि एवं धन-धान्य से परिपूर्ण एवं आपका जीवन खुशहाल रहे। अंधेरे के अन्त और उजाले के आगाज का प्रतीक यह त्योहर आपके जीवन और हमारे सीरवी समाज को रौशन करे, यही हमारी मंगल कामना हैं।

मेरा ऐसा मानना है कि आप जिस गंभीरता से अपने काम में गुणवत्ता देते हैं परिवार के साथ खुशियां मनाने को भी वही अहमियत दें।

हम सभी परिवार में कई जिम्मेदारियां निभाते हैं - पिता, माता, पति, पत्नी, भाई, बहन व अन्य रिश्ते-नाते। हमें चाहिए कि हर एक जिम्मेदारी निभाते हुए खुशियां बांटें। अपनों के साथ बिताये सुनहरे पलों को सब के लिए यादगार बनाएं।

आइए, हम सब ये संकल्प ले..
Posted By : Posted By Raju Seervi on 25 Oct 2021, 12:57:42
बीती को भूलना-एक मंत्र :- मनोहर सीरवी

दीपावली - प्रकाश पर्व! समृद्धि की देवी लक्ष्मी की उपासना का पर्व। अंधेरे पर उजाले की विजय का प्रतिक । बुराई पर अच्छाई की जीत। अज्ञानता पर ज्ञान का परिचय, आदि,आदि....।

आज हमारा सीरवी समाज भी विकास के बावजूद कई तरह के विवादों से जकड़ा हुआ है। कुरीतियों, आपसी राग-द्वेष समाज को जकड़े हुए है। आपसी वैमनस्यता इतनी ज्यादा है कि लगता है कि समाज बिखर जायगा। इन सबका मूल कारण हमारे समाज में एक दूसरे की टांग खिंचाई हैं। हम अहंकार में डूबे हुए है। सिर्फ स्वयं को ही सर्वश्रेष्ठ मान बैठे है। समाज तभी आगे बढ़ेगा जब हम सबको साथ लेकर चलें। बुराइयों की जड़ पर कुठाराघात करें।

हम अपना काम सही तरीके से तभी कर पायेंगे जब पिछली भूलों, कमियों गलतफहमियों, कमजोरियों को मन से निकाल देंगे। इन बातों को भूलने से प्रतिकूलता की भावना, अप्रिय प्रसंग के कडुवे अनुभव, व्यर्थ की हाय हाय मिट जाती हैं।

जो व्यक्ति हठ और नकारात्मक विचारों का शिकार रहता है, वह निरंतर पछतावे और बैर-विरोध की आग में जलता है। आत्मग्लानि का अनुभव करता है। उसके ह्रदय में हमेश..
Posted By : Posted By Raju Seervi on 01 Jul 2021, 05:43:58
सुखी जीवन का आधार एवं मानव का कर्तव्य

सुख किसे कहते हैं और वह कैसे प्राप्त होता हैं?..... इस प्रश्न पर विद्वानों के विभिन्न मत हैं।
मनुष्य के पास अथाह धन हो तो वह उससे तमाम मन चाही वस्तुएँ खरीद सकता है। हालांकि कितना भी धन क्यों न हो, उससे जीवन के लिये सुख नहीं खरीदा जा सकता है। स्पष्ट है कि मानव जीवनपर्यन्त जिस सुख की तलाश में व्याकुल रहता है, वह वास्तव में अनमोल होता है। यह सुख असल में कोई वस्तु न होकर एक भाव होता है। चूँकि यह भाव है तो उसे-महसूस भी करना होगा। यहाँ पर प्रश्न उठता है कि आखिर महसूस कैसे हो।
प्रायः यह देखा गया है कि कोई गरीब व्यक्ति किसी धनी व्यक्ति की तुलना में अधिक सुखी रहता है। इसका मुख्य कारण है कि वह छोटी छोटी वस्तुओं में अपने लिये सुख खोज लेता है। स्वास्थ्य भी सुखी जीवन का एक महत्वपूर्ण आधार होता है। एक स्वस्थ व सुखी दिनचर्या तभी बन सकती है जब आपको अच्छा भोजन और सुकून भरी नींद मिले। सुखी रहने के लिए व्यक्ति के मन में संतोष का होना भी अनिवार्य शर्त है। अन्यथा लालसा की अग्नि, सुख को भस्म कर सकती है। अपने जीवन के सुखमय बनाने के लिये हम..
Posted By : Posted By दलपत सिंह राठौड़ (बिलाड़ा ) on 21 May 2021, 06:
"विनाशक व्याधि"

मास फागुन में आँधी सी।
आयी विनाशक व्याधि सी।।

जाने किस ऋतुचक्र में फँसकर।
बेकसूर, निरपराधों को चटकर।
दुष्ट मायावी, कुलटा रूप लेकर।
अनगिनत बंधुओं पर पैर पसारकर।।
बन बैठी गृह स्वामिनी सी।
मुंह फुलाएं कुलघातिनी सी।।
आयी विनाशक...............

जाति,धर्म, मत,पंथ से ऊपर उठकर।
क्षेत्र, समुदाय विशेष से नाता तोड़कर।
नाम कोरोना विश्व प्रसिद्ध रखकर।
अकड़ अपनी हर घर-घर फैलाकर।।
बिन बुलाए मेहमान सरीखी सी।
बन गई भारत की साम्राज्ञी सी।।
आयी विनाशक..................

अपनों को अपनों से लूटकर।
असहाय, अनाथ उन्हें बनाकर।
रणभूमि अपनी यहाँ सुदृढ़कर।
कमजोर निर्धनों को निगलकर।।
ताक रही क्रूर गिद्ध दृष्टि सी।
आ बैठी निकृष्ट घमंडी सी।।
आयी विनाशक.............

पर आज यह संकल्प धारणकर।
मर्यादा,अनुशासित नियम अपनाकर।
तुझे भगा देंगे मन में निश्चयकर।
बनने नहीं देंगे पक्का यहाँ घर।।
देखती रह जाएगी तू ठगी सी।
शीघ्र बनाएंगे भू को निरोगी सी।।
आयी विनाशक.............

आओ हम सब संगठित होकर।
सरकारी निर्देशों की पालना कर।
महामारी को क्षिति..
Posted By : Posted By Raju Seervi on 26 Mar 2021, 01:14:39
मेरे सभी वन्दनीय बंधुजन-बहनों,
सादर वन्दे!
जय माँ श्री आईजी सा। सीरवी समाज की वेबसाइट "सीरवी समाज डॉट कॉम परिवार" की और से आप सभी का दिल की अन्तरंगता सु हार्दिक वन्दन-अभिनन्दन ।
समाज के समस्त सीरवी बन्धुओं, वरिष्ठ नागरिकों एवं अनुज भाई बहनों, वेबसाइट के विज्ञापन दाताओं, रचनाकारों, वेबसाइट प्रतिनिधियों तथा समस्त वेबसाइट स्टाफ को रंगों के पावन पर्व होली महोत्सव की दिल से हार्दिक बधाई एवं मंगलमय जीवन की अनेकानेक शुभकामनायें।
परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना है कि उत्तरायण का सूर्य आप सबकी जिन्दगी में अपरम्पार खुशियों की नव किरणें बिखेरे और सुख-शान्ति को आपके जीवन में स्थिरता प्रदान करे।
बंधुओं, समाज सेवा निश्चित ही कड़ी साधना है। यदि आप सच्चे समाज सेवी है तो बिना फल की चिंता किये अपना निस्वार्थ भाव से कार्य कीजिए। आपके मन में सेवा भावना होनी चाहिए, दिखावा नहीं। समाज सेवा हेतु किसी शैक्षिक संस्था के डिग्री की कोई जरूरत नही है और न ही किसी सरकारी पद की। आप स्वयं देख लें जितने संत महात्मा हुये है वे कोई ज्यादा पढ़े लिखे लोग नही है लेकिन उमने सेवा भ..
Posted By : Posted By Raju Seervi on 13 Mar 2021, 14:08:52
आदरणीय आत्मीय जन
सादर अभिवादन।

आप फेसबुक या व्हाट्सएप समूहों में एक चित्रकार की कहानी अवश्य पढ़ी होगी जो एक चित्र बनाकर चौराहे पर इस आशय से टांग दिया कि इसमें जो कमियां हों, निशान लगा दे। सुबह से शाम तक हजारों निशान अपने ज्ञान को प्रदर्शित करने हेतु लग गये। परन्तु उसी चित्र को हूबहू उस आशय से दूसरे दिन टांगा गया कि इसमें जो कमियाँ हो, उसे सुधार देवें तो दो दिन तक उसमें कोई सुधार नहीं किया गया। इससे यह सीख़ तो मिलती है कि कमियाँ निकालने वाले खूब है; समाधान या सुधार का रास्ता सुझाने वाले बिरले ही हैं।

ठीक उसी तरह हमारे समाज की भी हालत है। अपनी कमी ढूंढने के बजाया दूसरों की कमियाँ को ढूंढ-ढूंढकर उसे छोटा या अपराधी बनाने या अपमानित कर अपने को ज्ञानी एवं बड़ा तथा अनुभवी एवं न्यायप्रिय एवं निष्पक्ष प्रदर्शित करने की होड़ सी लगी है परन्तु आत्मीय समाधान सुझाने वालों की कमी सी लगती है। यह प्रमाणित है कि गलतियाँ उसी से होंगी जो काम करेगा, जो कुछ करेगा ही नहीं, वह दूसरे की कमी निकालकर ही अपनी कमी जाहिर कर देता है। अच्छे लोगों में भी कमियाँ है तथा बुरे लोगों में..
Posted By : Posted By Manohar Seervi on 19 Jan 2021, 11:06:03
एक आदमी था, जो हमेशा अपने संगठन में सक्रिय रहता था, उसको सभी जानते थे ,बड़ा मान सम्मान मिलता था; अचानक किसी कारण वश वह निष्क्रीय रहने लगा , मिलना - जुलना बंद कर दिया और संगठन से दूर हो गया।

कुछ सप्ताह पश्चात् एक बहुत ही ठंडी रात में उस संगठन के मुखिया ने उससे मिलने का फैसला किया । मुखिया उस आदमी के घर गया और पाया कि आदमी घर पर अकेला ही था। एक बोरसी में जलती हुई लकड़ियों की लौ के सामने बैठा आराम से आग ताप रहा था। उस आदमी ने आगंतुक मुखिया का बड़ी खामोशी से स्वागत किया।

दोनों चुपचाप बैठे रहे। केवल आग की लपटों को ऊपर तक उठते हुए ही देखते रहे। कुछ देर के बाद मुखिया ने बिना कुछ बोले, उन अंगारों में से एक लकड़ी जिसमें लौ उठ रही थी (जल रही थी) उसे उठाकर किनारे पर रख दिया। और फिर से शांत बैठ गया।

मेजबान हर चीज़ पर ध्यान दे रहा था। लंबे समय से अकेला होने के कारण मन ही मन आनंदित भी हो रहा था कि वह आज अपने संगठन के मुखिया के साथ है। लेकिन उसने देखा कि अलग की हुई लकड़ी की आग की लौ धीरे धीरे कम हो रही है। कुछ देर में आग बिल्कुल बुझ गई। उसमें कोई ताप नहीं बचा। उस लकड़ी ..
Posted By : Posted By Raju Seervi on 11 Jan 2021, 01:12:55
हमें अपने समाज पर गर्व है

प्रिय बंधुओं
आप सभी का सादर अभिवादन है

आप सभी को मकर सक्रांति, गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई व शुभकामनायें। हमारे वरिष्ठजनों ने अपनी मेहनत, लगन और सामाजिक सेवा से समाज को आज इस स्तिथि में ला दिया है कि हम आज अन्य समाजों में सर्वाधिक आदर की दृष्टि से देखे जाते हैं। यह हमारे प्रयासों का फल है।

हमारा मूल उद्देश्य ही जन सेवा है। सेवा भाव ही किसी समाज का प्राण तत्व होता है। ये समाज है, अगर आपने सच्चे मन से जन सेवा कि है तो निश्चत ही जन सामान्य उसे सराहेगा।

बंधुओं, समाजसेवा निश्चित ही एक कड़ी साधना है। यदि आप सच्चे समाजसेवी हैं तो बिना फल को सोचे, अपना कार्य निरन्तर करते हुए अपना अनुभव समाज सहयोग में करते जाएं। संत कबीरदास, रहीम, तुलसीदास आदि लोग कौन ज्यादा पढ़े-लिखे थे लेकिन इन लोगों ने समाज और देश को राह दिखाई, जनता की आँखे खोली, अपने समाज हित के कार्यों से ऊपरी चमक दमक कोई मायने नहीं रखता।

जो बोते हैं, उन्हीं को काटने का अवसर भी प्राप्त होता है। जो जैसा बोता है, उसी के अनुसार उसको वैसा ही चाकने को मिलता है। इसी तरह प्..
Result : 1 - 15 of 120   Total 8 pages