सीरवी समाज - सीरवी जितेन्द्र सिंह राठौड़ उर्फ़ जीतू सर - ब्लॉग

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Posted By : Posted By seervi on 29 Aug 2019, 04:59:30
जब में लिखने बैठता हु, सोचने बैठता हु की क्या लिखू - तब सबसे पहले मेरे मन में ख़याल आता है की मेरे लेखन का दायरा कितना होना चाहिए l सीरवी समाज के आदरणीय गणमान्य नागरिको हर सोच का एक दायरा होता है, आजकल हम सोशल मीडिया पर विभिन्न तरीके के विचारो से रूबरू होते है, प्रत्येक विचार को जब हम पढ़ते है तब हम उसे मन ही मन अपने दायरे में समाहित कर के समझने की कोशिश करते है, प्रत्येक विचार अपने समझने वाले को अलग अलग मानसिकता से ग्रसित करता है, इसमें उस विचार की मूल अवधारण भी कभी कभी गायब हो जाती है, क्यूंकि पाठक की मानसिकता उस विचार में वही देखती है जो वह देखना चाहती है l अर्थार्थ सभी का अपना अपना एक सही होता है और उसी मुताबिक़ मानसिकता भी होती हैहर द्रश्य या लिखित उसी मानसिकता के प्रभाव को इंगित करते हुए समझने में आती है l
मेरे परम मित्र श्री हीराराम गहलोत जो की पेशे से अध्यापक है शिक्षाविद है के द्वारा अभी हाल ही में एक बहुत ही प्रेरणादायक लेख सामने आया है जिसके अनुसार यह चिंता जाहिर की गयी है की "आखिर हमारी यह सोच कब बदलेगी? क्या हम ऐसी घटिया मानसिकता से समाज का उत्थान कर पा..
Posted By : Posted By seervi on 20 Aug 2019, 04:28:06
नमस्कार .. शुभ प्रभात ... मित्रो ... बंधुओ ... सदस्यों
सत्यम शिवम् सुन्दरम - सोशल मीडिया सीरवी सामाजिक विचारको का मंच

विगत कुछ हफ्तों से सोशल मीडिया पर विभिन्न माध्यमो पर प्रसारित सीरवी युवाओं की वार्ताओं, फेसबुक कमेंट और पोस्ट पर एक सरसरी निगाह डालने के पश्चात एक राय जेहन में उभरी है, आपके समक्ष पेश है -

कोई पांच छ: साल पहले की बात है, तब इन्टरनेट का विस्तार और स्मार्ट फोन की उपलब्धता इतनी व्यापक नहीं थी, बेल्लारी वाले राज राठोर के अनुसार तब ऑरकुट का ज़माना था, और मीडिया में सीरवी समाज के  पत्रकार के रूप में मंगल सेनचा का अपना एक प्रभाव था, सामयिक और समसामयिक घटनाओं और समाज के विभिन्न गुटों संघठनो संस्थाओं पर उनकी पेनी नजर रहती थी, उस समय सामान्य बाजार भी काफी तेज थे, आम आदमी के पास सोशल मीडिया के लिए समय भी नहीं था - मैं बात कर रहा हु उस समय की - जब फेसबुक और व्हाट्स अप्प पर विभिन्न तरह के अभिवादन और उस से जुड़े फोटो विडियो मेसेज का प्रसारण बहुतायत से लोग करते थे, सोशल मीडिया पर इक्की दुक्की जगह पर अपने सामाजिक विचारो को रखने वाले कुछ सीरवी  बंधू जैसे स्व. मंग..
Posted By : Posted By seervi on 12 Aug 2019, 07:02:11
लेकिन ....
शाशन ऐसा नहीं सोचता .... चाहे वह बीजेपी का हो चाहे कांग्रेस का या लेफ्ट इत्यादि ...
शाशन में संतुलन को तरजीह दी जाती है, आपने अपने लेख में मुस्लिम शब्द का इस्तेमाल किया, सबका दिल जीत लिया, क्यूंकि वर्तमान में राष्ट्रवाद का तत्पार्य ही यही है, एक तरफ आप भारतीयता की बात कर रही है, दूसरी तरफ आपने धर्म में बाँट दिया ... खेर कोई बात नहीं ... आपने विचार प्रस्तुत किये यह बहुत अच्छी बात है ....
अमेरिका के मूल निवासी जिन्हें रेड इंडियन कहा जाता है, आज विलुप्ति की कगार पर है, अब्राहम लिंकन को वेम्पायेर हंटर कहा जाता रहा है, अमेरिका की शिक्षा पद्धति और समाजवाद प्रत्येक नागरिक चाहे वह स्त्री हो चाहे पुरुष हो सामान अधिकार देता है, अत्याधुनिक मशीनों से वो कार्य होते है जिन्हें समाज के निचले तबके के लोग मजदूरी के लिए करते है, और जो कार्य संभव नहीं हो पाते या जिनके लिए मजदूर (श्रमिक - कुशल अकुशल अर्धकुशल) उपलब्ध नहीं हो पाते उन कामो को आउटसोर्सिंग के द्वारा विकासशील देशो में सस्ते श्रम हेतु करने के लिए दिया जाया है, वहा की शिक्षा पद्धति नए आईडिया का निर्माण करने को तरजीह ..
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