विचार मेरे विचारो में - पुरूस्कार 1000 रु नोट : - प्रतिभागी अपने लेख/आलेख/निबंध - सादे कागज़ पर पैन से लिखकर, उक्त संपर्क सूत्र पर फोटो के माध्यम से भी भेज सकते है प्रत्येक पखवाड़े एक विषय पर आपके विचार आमंत्रित है, श्रेष्ट रचना को सीरवी समाज डॉट कॉम की तरफ से 1000 रु का पुरूस्कार भेजा जाएगा l भेजे गए विचार मौलिक होने चाहिए, एवं कुल कम से कम 5 प्राप्त विचारो में से ही श्रेष्ट का चुनाव किया जाएगा .... *****आज का टॉपिक - मेरे समाज की बेटी को पढना क्यों चाहिए ***** समय सीमा -15 फरवरी से 30 फरवरी तक इच्छुक प्रतिभागी उक्त टॉपिक पर अपनी मौलिक रचना निम्न पर अपने सम्पूर्ण परिचय एवं फोटो के साथ भेजे E-mail : seervi@yahoo.com Whats app : 02930222261

Posted On : 20-02-2020

सीरवी समाज मुख्य समाचार

बधाई सन्देश - सीरवी समाज डॉट कॉम


कानाराम जी को जिला कलेक्टर डूंगरपुर बनने पर सीरवी समाज डॉट कॉम की तरफ से हार्दिक बधाई एवं अभिनन्दन...

10 Feb 2020, 04:29:31 पूरा पढ़े

संवाद - विचारो की दुनिया


नक्कारखाने में तूती की आवाज कौन सुनता है, सभी बहरे है, बावरें है ये सब हिंदी के मुहावरें हैं... - प्रस्तुति - खींवाराम चौधरी, प्रधानाचार्य रा. उ. माँ. वि. जाडन, पाली

हिंदी का थोडा़ आनंद लीजिये ....मुस्कुरायें हिंदी के मुहावरे बड़े ही बावरे है, खाने पीने की चीजों से भरे है.. कहीं पर फल है तो कहीं आटा दालें है, कहीं पर मिठाई है, कहीं पर मसाले है, चलो, फलों से ही शुरू कर लेते है, एक एक कर सबके मजे लेते है... आम के आम और गुठलियों के भी दाम मिलते हैं, कभी अंगूर खट्टे हैं, कभी खरबूजे, खरबूजे को देख कर रंग बदलते हैं, कहीं दाल में काला है, तो कहीं किसी की दाल ही नहीं गल

Posted By seervi on 20 Feb 2020, 04:28:20 पूरा पढ़े


सीरवी समाज डॉट कॉम टीम


राजू सीरवी
(संस्थापक)

जितेन्द्र सिंह
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"seervisamaj.com" ( सीरवी समाज डॉट कोम) पुरी दुनिया के सीरवी समाज को आपस मे जोड़ने के रुप मे स्वयं का मंच प्रदान करने वाला एक मात्र विश्वसनीय संगठन है जो समाज की एकता , समस्त संगठनों की योजक कड़ी तथा सभी रजिस्टर्ड संस्थाओं को बढावा देने को ध्यान मे रखकर स्वाभीमानी,संगठित,अनुशासित,व कर्मठ कार्यकर्ताओ के बल पर कार्यरत है ओर राष्ट्रीय द्रष्टीकोण के साथ शिक्षा के विकास , समाज सुधार व विकास के नए आयाम की सोच रखने वाले विद्वानों द्वारा बताए मार्ग पर चलते हुए सम्पूर्ण सीरवी समाज को आपस मे जोड़ना ही हमारा मुख्य उद्देश्य है। हमारी टीम पूर्ण लोकतांत्रिक पद्धति से कार्यरत रहते हुए आपने लक्ष्य की ओर अग्रसर है।

सीरवी समाज का संक्षिप्त परिचय

सीरवी एक क्षत्रिय कृषक जाति हैं. जो आज से लगभग 800 वर्ष पुर्व राजपूतों से अलग होकर राजस्थान के मारवाड़ व गौडवाड़ क्षेत्र में रह रही थी. कालान्तर के बाद यह लोग मेवाड़, मालवा, निम्हाड़ व देश के अन्य क्षेत्र में फेल गयें. वर्तमान में सीरवी समाज के लोग राजस्थान के अलवा मध्यप्रदेश , गुजरात , महाराष्ट्र , गोवा , कर्नाटक , आध्रप्रदेश , तमिलनाडु , केरल , दिल्ली , हिमाचल प्रदेश , दमन दीव , पांण्डिचेरी व देश के अन्य क्षैत्र में बड़ी संख्या में रह रहे हैं.

सीरवी समाज के इतिहास का बहुत कम प्रमाण उपलब्ध हैं. इतिहास के जानकार स्व. मास्टर श्री शिवसिंहजी चोयल भावी ( जिला जोधपुर ) वालों ने अपने सीमित सोधनों में जो कुछ भी तथ्य जुटाये उनके आधार पर खारड़िया राजपूतों का शासन जालोर पर था व राजा कान्हड़देव चौहान वंशीय थे उन्ही के वंश 24 गौत्रीय खारड़िया सीरवी कहलाये. सीरवियों के गौत्र इस प्रकार हैं. 1. राठौड़ 2. सोलंकी 3. गहलोत 4. पंवार 5. काग 6. बर्फा 7. देवड़ा 8. चोयल 9. भायल 10. सैणचा 11. आगलेचा 12. पड़ियार 13. हाम्बड़ 14. सिन्दड़ा 15. चौहान 16. खण्डाला 17. सातपुरा 18. मोगरेचा 19. पड़ियारिया 20. लचेटा 21. भूंभाड़िया 22. चावड़िया 23. मुलेवा 24. सेपटा. अधिकतर सीरवी आईमाता के अनुवयी हैं. श्री आईमाता का मंदिर राजस्थान के बिलाड़ा कस्बा में हैं.

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निवेदनः :

आप सभी सीरवी भाईयों से निवेदन है कि आप अपने-अपने सुझाव भेजकर इस वेब साईट को मजबूत बनायें ताकि आपसी सम्पर्क मे उपयोंग ले सके। आप सभी से निवेदन है। कि आप अपने-अपने क्षेत्र की संस्थाओ की पूरी जानकारी rajuseervi@yahoo.com or seervi@yahoo.com Whats app : 9460776932 को भेजें, या आप कोरियर द्वारा भी भेज सकते हैं। मुझे पूरी आशा है कि आप सभी लोग समाज को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर जोड़ने मे हमारी सहायता करेगे।