सीरवी समाज - ब्लॉग

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Posted By : Posted By seervi on 24 Aug 2019, 03:46:52
निबंध:-शिक्षा हमें अपनी मुश्किलों से आगे देखना सिखाती है।
शिक्षा एक प्रकाश का वह स्रोत है जो जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में हमारा सच्चा पथ प्रदर्शक करती है।शिक्षा हमें अज्ञानता से बाहर निकालती है।शिक्षा अंधेरे से उजाले की ओर ले जाती है।हम सब शिक्षा की महत्ता जानते है।शिक्षा एक दिव्य प्रकाश पुंज है जिससे सर्वत्र उजियारा ही उजियारा होता है।
शिक्षा शब्द संस्कृत के 'शिक्ष' धातु से बना है जिसका अर्थ है -सीखना औऱ सिखाना। अर्थात सीखना औऱ सिखाने को प्रक्रिया ही शिक्षा है।सीखने औऱ सिखाने की प्रक्रिया में बहुत कुछ गहराई है।इस प्रक्रिया में दो केंद्र शिक्षार्थी औऱ शिक्षक न होकर तीन केंद्र हो जाते है,एक पाठ्यक्रम भी जुड़ जाता है।शिक्षा एक त्रिआयामी प्रक्रिया बन जाती है।यह त्रि-आयाम शिक्षा को पूर्णता प्रदान करता है।
भारतीय पवित्र ग्रन्थ "गीता" में शिक्षा के लिए लिखा है कि "सा विद्या विमुक्ते।"यानि विद्या(शिक्षा) वही जो बंधनो से मुक्त करे। शिक्षा जीवन की खुशहाली के मार्ग में आने वाली हर विपत्ति या मुश्किलों से मुकाबला करना सिखाती है।
भारतीय महान वि..
Posted By : Posted By seervi on 23 Aug 2019, 05:28:30
शिक्षा हम्हे अपनी मुश्किलों से आगे देखना सिखाती है : प्रस्तुति - पदमा चौधरी, JEN- सूरतगढ़

बढती हुई प्रतिस्पर्धा तथा वर्तमान परिस्थितियों की जटिलता को देखते हुए यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा की शिक्षा एक मित्र की भाँती हमारा साथ देते हुए मुश्किलों से आगे देखना सिखाती है तथा विपरीत परिस्थितियों में भी हमारा मनोबल बढाकर मार्ग प्रशस्त करती है l बाल्यकाल से युवावस्था तक अर्जित शिक्षा रूपी धन एक गुरु की भाँती जीवन पर्यंत व्यक्ति का मार्गदर्शन करता है l
चाहे बाल्यकाल में माता की गोद में खेलते हुए स्वर व्यंजन का आलाप, चाहे विद्यालय में शिक्षको द्वारा हल करवाए गए गणित के प्रश्न, चाहे उच्च शिक्षा में विभिन्न विषयो का गहन अध्ययन आदि मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाते है तथा देनिक गतिविधियों को सरलता से निर्वाह करने की समझ देते है l
शिक्षा व्यक्ति में समझ, साहस, सृजनता, आत्मविश्वाश, सहिष्णुता, संबलता, वाकपटुता, तार्किकता, मोलिकता, सद्भावना आदि गुणों का संचार करती है तथा इसी के फलस्वरूप व्यक्ति में सकारात्मक दृष्टीकोण का उद्भव होता है जो मुश्किलों भरे इस स..
Posted By : Posted By seervi on 20 Aug 2019, 04:28:06
नमस्कार .. शुभ प्रभात ... मित्रो ... बंधुओ ... सदस्यों
सत्यम शिवम् सुन्दरम - सोशल मीडिया सीरवी सामाजिक विचारको का मंच

विगत कुछ हफ्तों से सोशल मीडिया पर विभिन्न माध्यमो पर प्रसारित सीरवी युवाओं की वार्ताओं, फेसबुक कमेंट और पोस्ट पर एक सरसरी निगाह डालने के पश्चात एक राय जेहन में उभरी है, आपके समक्ष पेश है -

कोई पांच छ: साल पहले की बात है, तब इन्टरनेट का विस्तार और स्मार्ट फोन की उपलब्धता इतनी व्यापक नहीं थी, बेल्लारी वाले राज राठोर के अनुसार तब ऑरकुट का ज़माना था, और मीडिया में सीरवी समाज के  पत्रकार के रूप में मंगल सेनचा का अपना एक प्रभाव था, सामयिक और समसामयिक घटनाओं और समाज के विभिन्न गुटों संघठनो संस्थाओं पर उनकी पेनी नजर रहती थी, उस समय सामान्य बाजार भी काफी तेज थे, आम आदमी के पास सोशल मीडिया के लिए समय भी नहीं था - मैं बात कर रहा हु उस समय की - जब फेसबुक और व्हाट्स अप्प पर विभिन्न तरह के अभिवादन और उस से जुड़े फोटो विडियो मेसेज का प्रसारण बहुतायत से लोग करते थे, सोशल मीडिया पर इक्की दुक्की जगह पर अपने सामाजिक विचारो को रखने वाले कुछ सीरवी  बंधू जैसे स्व. मंग..
Posted By : Posted By seervi on 19 Aug 2019, 07:05:41
सोशल मीडिया के महत्व को समझे सीरवी समाज अनमोल अवसर यूं न गवाएं

वर्तमान समय में सोशल मीडिया सूचनाओं को आसानी से आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसकी व्यापकता और कम समय में अधिक से अधिक लोगों तक जरुरी सूचनाएँ पहुंचाने की क्षमता तमाम लोगों के लिए बेहद सुविधाजनक है वहीं दूसरी तरफ उन्माद फैलाने वाले कुछ लोग इसका दुरुपयोग भी कर रहे हैं।

कुछ महीनों पहले मैं इलैक्ट्रॉनिक मिडिया तन्त्र से अनजान थी किताबों में ही ज्यादा व्यस्त रहती थी लेकिन अब इलैक्ट्रॉनिक मिडिया संसार के बारे मे थोड़ा जानने लगी हूँ, समाज का अपना कोई मीडिया नहीं था। समाज विकास के सम्बन्ध मे अपने विचार र्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाना तो दूर... एक ही गांव में संवाद चिंतन तक नहीं हो पाता था।

मिशन के कुछ जुनूनी लोग अपना सुख छोड़, सामाज में पत्रिका का कार्य करते रहे, लेकिन समाज ने उनको सहयोग......रहा अब सोशल मीडिया की क्रांति ने हमें अपने समाज की सामाजिक वैचारिक जागृति मे परिवर्तन के लिए अनमोल मंच मिला है, जैसे "सीरवी समाज सम्पूर्ण भारत डॉट कॉम" हमारे समाज का एक बेहतरीन प्लेटफार..
Posted By : Posted By seervi on 14 Aug 2019, 06:09:35
विवाह की बढ़ती उम्र पर खामोशी क्यों...?
30-35 साल की युवक युवतियां बैठे है कुंवारे, फिर मौन क्यों हैं समाज के कर्ता-धर्ता
कुंवारे बैठे लड़के लड़कियों की एक गंभीर समस्या आज कमोबेश सभी समाजों में उभर के सामने आ रही है। इसमें लिंगानुपात तो एक कारण है ही मगर समस्या अब इससे भी कहीं आगे बढ़ गई है। क्योंकि 30 से 35 साल तक की लड़कियां भी कुंवारी बैठी हुई है। इससे स्पष्ट है कि इस समस्या का लिंगानुपात ही एकमात्र कारण नहीं बचा है। ऐसे में लड़के लड़कियों के जवां होते सपनों पर न तो किसी समाज के कर्ता-धर्ताओं की नजर है और न ही किसी रिश्तेदार और सगे संबंधियों की। हमारी सोच कि हमें क्या मतलब है में उलझ कर रह गई है। बेशक यह सच किसी को कड़वा लग सकता है लेकिन हर समाज की हकीकत यही है, 25 वर्ष के बाद लड़कियां ससुराल के माहौल में ढल नहीं पाती है, क्योंकि उनकी आदतें पक्की और मजबूत हो जाती हैं अब उन्हें मोड़ा या झुकाया नहीं जा सकता जिस कारण घर में बहस, वाद विवाद, तलाक होता हैं बच्चे सिजेरियन ऑपरेशन से होते हैं जिस कारण बाद में बहुत सी बिमारी का सामना करना पड़ता है ।
शादी के लिए लड़की की उम्र 18 साल व ल..
Posted By : Posted By seervi on 14 Aug 2019, 06:07:36
समस्या - *"बेटा, मेरी बहुएं मेरा कहना नहीं सुनती। सलवार सूट और जीन्स पहन के घूमती हैं। सर पर पल्ला/चुनरी नहीं रखती और मार्किट चली जाती हैं। मार्गदर्शन करो कि कैसे इन्हें वश में करूँ..."*

*समाधान* - आंटी जी चरण स्पर्श, पहले एक कहानी सुनते हैं, फिर समस्या का समाधान सुनाते हैं।

"एक अंधे दम्पत्ति को बड़ी परेशानी होती, जब अंधी खाना बनाती तो कुत्ता आकर खा जाता। रोटियां कम पड़ जाती। तब अंधे को एक समझदार व्यक्ति ने आइडिया दिया कि तुम डंडा लेकर दरवाजे पर थोड़ी थोड़ी देर में फटकते रहना, जब तक अंधी रोटी बनाये। अब कुत्ता *तुम्हारे हाथ मे डंडा देखेगा और डंडे की खटखट सुनेगा तो स्वतः डर के भाग जाएगा रोटियां सुरक्षित रहेंगी*। युक्ति काम कर गयी, अंधे दम्पत्ति खुश हो गए।

कुछ वर्षों बाद दोनों के घर मे सुंदर पुत्र हुआ, जिसके आंखे थी और स्वस्थ था। उसे पढ़ा लिखाकर बड़ा किया। उसकी शादी हुई और बहू आयी। बहु जैसे ही रोटियां बनाने लगी तो लड़के ने डंडा लेकर दरवाजे पर खटखट करने लगा। बहु ने पूँछा ये क्या कर रहे हो और क्यों? तो लड़के ने बताया ये हमारे घर की परम्परा है, मेरी माता जब भी रोटी बनाती..
Posted By : Posted By seervi on 12 Aug 2019, 07:02:11
लेकिन ....
शाशन ऐसा नहीं सोचता .... चाहे वह बीजेपी का हो चाहे कांग्रेस का या लेफ्ट इत्यादि ...
शाशन में संतुलन को तरजीह दी जाती है, आपने अपने लेख में मुस्लिम शब्द का इस्तेमाल किया, सबका दिल जीत लिया, क्यूंकि वर्तमान में राष्ट्रवाद का तत्पार्य ही यही है, एक तरफ आप भारतीयता की बात कर रही है, दूसरी तरफ आपने धर्म में बाँट दिया ... खेर कोई बात नहीं ... आपने विचार प्रस्तुत किये यह बहुत अच्छी बात है ....
अमेरिका के मूल निवासी जिन्हें रेड इंडियन कहा जाता है, आज विलुप्ति की कगार पर है, अब्राहम लिंकन को वेम्पायेर हंटर कहा जाता रहा है, अमेरिका की शिक्षा पद्धति और समाजवाद प्रत्येक नागरिक चाहे वह स्त्री हो चाहे पुरुष हो सामान अधिकार देता है, अत्याधुनिक मशीनों से वो कार्य होते है जिन्हें समाज के निचले तबके के लोग मजदूरी के लिए करते है, और जो कार्य संभव नहीं हो पाते या जिनके लिए मजदूर (श्रमिक - कुशल अकुशल अर्धकुशल) उपलब्ध नहीं हो पाते उन कामो को आउटसोर्सिंग के द्वारा विकासशील देशो में सस्ते श्रम हेतु करने के लिए दिया जाया है, वहा की शिक्षा पद्धति नए आईडिया का निर्माण करने को तरजीह ..
Posted By : Posted By seervi on 12 Aug 2019, 03:53:37
..........कड़वा सच ..........

मेने जो लिखा सामाजिक बटवारा एक कड़वा सच है , समाज को तकलीफ पहुचाने वाला था । मै भी आपकी बात से सहमत हूँ, मेने जो लिखा वह समाज को ठेस पहुचाने वाला था । एक दिन के लिए सभी लोग ये सोच ले की में न सीरवी हूँ ,न में जैन हूँ , न में सोनी हूँ न तो मेरा कोई धर्म है और न कोई समाज । में सिर्फ हिंदुस्तानी हूँ और मुझे सिर्फ भारत माता के लिए जीना हैं और भारतमाता की रक्षा करना हैं ।
में ये सब बार बार इसलिए लिख रही हूं क्योंकि हमारी जन्मभूमि भारतमाता पर दिन ब दिन मुस्लिम जनसँख्या बढ़ती जा रही है ,आज हमारा हिन्दू जिसकी शादी 18 से लेकर 25 की उम्र तक हो जानी चाहिए लेकिन सामाजिक सीमा के कारण वह 35 से 40 साल अनमैरिड ही रह जाता है और तब तक एक मुस्लिम चार बच्चे पैदा कर लेता है मतलब हिंदुस्तानी एक और मुस्लिम की संख्या 5 से 6 तक पहुच जाती है। डर इस बात का हे कि हम समाज समाज करते रहेंगे और मुस्लिम हिंदुस्तान पर राज करने लगेगा ,क्योंकि मुस्लिम में करीबी रिस्तो में शादी करने का रिवाज है वो लोग तो अपनी सगी मौसी ,मामा बुआ जैसे करीबी रिश्तो में शादी करते हे और उनको कोई नहीं रोकता है ।मेने ..
Posted By : Posted By seervi on 12 Aug 2019, 03:51:46
..........समाज का बटवारा ...........

आज में समाज के विपक्ष में लिखना चाहती हूँ शायद आपको मेरे विचार पसंद न आये पर फिर भी में अपने विचार समाज के समक्ष रखना चाहती हूँ ।
क्या आज की युवा पीढ़ी को समाज में ही शादी करने के लिए जोर देना चाहिए , परिवार के जोर देने से लड़का लड़की शादी तो कर लेते है ,लेकिन फिर वही सुनने में आता है कि या तो। लड़के ने लड़की को छोड़ दिया क्योंकि लड़का का किसी और लड़की के संपर्क में था या लड़की को लड़का पसंद नहीं था तो लड़की भाग गयी तब माँ बाप पछताते हे की पहले ही हमने अपने बच्चो की सुन ली होती तो ये दिन ही नहीं देखना पड़ता ।
दूसरे समाज में शादी करने से क्या नुकसान है क्या समाज की संख्या कम हो जायेगी या समाज समाप्त हो जायेगा ,यदि हम समाज की लड़की देंगे तो दूसरे समाज की लड़की लाएंगे भी और जब बच्चा छोटा होता है तो वो नहीं जानता है कि समाज होता क्या है । obc , st. या general क्या है । हम लोग ही बच्चे को समाज में भेद करना समझाते हे , यदि सीरवी समाज का बच्चा हिन्दू हे तो दूसरी समाज का बच्चा भी तो हिन्दू ही होगा । तो क्या हम हिन्दू ही एक दूसरे में समाज का सहारा ले कर अपने आप को अलग अलग सम..
Posted By : Posted By seervi on 12 Aug 2019, 03:51:19
एक बार महालक्ष्मी भगवान से किसी बात पर नाराज हो गयी और उन्होंने अपना विरोध प्रकट किया तो प्रभु ने उनसे पूछा की महालक्ष्मी बताये आपको क्या चाहिए तो महालक्ष्मी ने कहा कि प्रभु मुझे अभी ही एक वरदान दीजिये , तो प्रभु ने उन्हें वरदान दिया कि जाइये महालक्ष्मी आप जब चाहे ,जिसे चाहे ,जो चाहे दे सकती है ,पर याद रखिए कि उसे छिनने का अधिकार मेरे पास होगा। जब माँ सरस्वती को ये बात पता चली तो उन्होंने भी भगवान की स्त्तुति की पुरे मन से उनकी आराधना की तो भगवान उनसे प्रसन्न हुए और बोले सरस्वती आपको क्या चाहिए तो माँ सरस्वती ने कहा कि प्रभु मुझे भी एक वरदान चाहिए तो भगवान मुस्कुराये और उन्होंने माँ सरस्वती को वरदान दिया कि जाइये सरस्वती आप भी जिसे चाहे जो चाहे दे सकती है,पर उसे छिनने का अधिकार मेरे पास नहीं होगा। कहने का मतलब हम दुनिया में धन दौलत कमाते हे तो धन दौलत आनी जानी है,लेकिन आपका हुनर ,कला और आपका ज्ञान आपसे कोई नहीं छीन सकता ।कहने का मतलब जब मन लगा कर ज्ञान ग्रहण किया जाये तो उसे छीनने का अधिकार स्वयं भगवान विष्णु के पास भी नहीं होता है ,लेकिन पैसा तो हाथ का मेल ..
Posted By : Posted By seervi on 12 Aug 2019, 03:50:49
मृत्युभोज
जब भी मृत्युभोज को बंद करने की बात होती है तो बहुत से लोग या हमारे बुजुर्गइस बात को लेकर बहुत से प्रश्न खड़े कर देते है कि क्या आपत्ति हैं मर्त्युभोज से
और सही भी हे की भला क्या आपत्ति है समाज के लोगो को मर्त्युभोज से
जिन लोगों को मर्त्युभोज से आपत्ति नहीं है वे लोग कहते हे की तुम लोग मर्त्युभोज बंद करने के बजाय अपना जन्मदिन मत मनाओ,होटलो में खाना मत खाओ,घूमने में पैसा खर्च मत करो या शादी में भी खर्च मत करो ऐसे बहुत से प्रश्न खड़े कर दिए जाते हैं
लेकिन एक प्रश्न यह भी हे की जन्मदिन साल में एक दिन का होटलो में खाना महीनो में कभी ,घूमने में पैसा खर्च ज्यादा तर फॅमिली के साथ ही होता है और शादी भी 2 या 3 दिन की पहले के समय में शादी 8,10 या 15 दिन की भी होती थी,लेकिन अब समय की कमी होने के कारण शादिया भी सिमट कर 3 ,2 या 1 दिन की ही रह गयी है । अब बात आती है मृत्युभोज की मृत्युभोज 1 दिन का ,2 दिन का ,3 दिन का ,4 दिन का ,5 दिन का 6 दिन का , 7 दिन का ,8 दिन का ,9दिन का , 10 दिन का ,11 दिन का नहीं 12 दिन का होता है और सबसे बड़ा खर्च भी मर्त्युभोज में ही होता होगा । प्रश्न तो यहाँ होना चाहिए की यदि शा..
Posted By : Posted By seervi on 11 Aug 2019, 05:21:45
झूठ बोलते वक्त हमारे दिमाग में आखिर चलता क्या है? आप पढ़िये एवम जानिये अपने दिमाग का कोनसा हिस्सा कैसे काम करता हैं

कहा जाता है कि चोर की दाढ़ी में तिनका होता है, मतलब यही है कि झूठ बोलने वाले गलत काम करने वाले के मन में चोर छुपा हुआ रहता है, जो उसे कोई न कोई गलती करने पर मजबूर कर देता है। इसी गलती को पकड़कर इतने सालों से पुलिस, जासूस, सीआईडी वाले अपना काम निकाल रहे हैं। दरअसल जब भी हम किसी भी बात को छुपाने की कोशिश करते हैं तो हमारे दिमाग में एक खास किस्म का केमिकल लोचा होने लगता है।

दरअसल किसी भी तथ्य को छुपाने के लिये झूठ का सहारा लेना ही पड़ता है।

मगर इंसानी दिमाग खुद को धोखा नहीं दे सकता है। बस इसी वजह से झूठ बोलने पर दिमाग में एक खास हिस्से में अलग तरह के संकेत उत्पन्न होने लगते हैं। वैसे इंसानी दिमाग इस कायानात की अब तक की सबसे अनोखी चीज है। इस जटिल उत्तक की पहेली को ना कोई सुलझा सका है और ना ही किसी मशीन में इतनी काबिलियत है कि वह विधाता के बनाए इस सुपरकंप्यूटर से आगे निकल पाए।


जिस तरह से कम्प्यूटर की हार्ड ड्राइव काम करती है, ठीक उसी तरह हम..
Posted By : Posted By seervi on 09 Aug 2019, 05:49:05
मान्यता के आधार पर अगर देखा जाये तो दुनिया में दो प्रकार के लोग होते है – एक आस्तिक और दुसरे नास्तिक । नास्तिक होना भी तब तक बुरा नही है जब तक कि आप दुसरे की भावनाओं को ठेस ना पहुचायें । आस्तिक लोगों में एक अलग ही प्रकार की शक्ति होती है, जिसे श्रृद्धा और विश्वास की शक्ति कहा जा सकता है । फिर चाहे वो किसी भी ईश्वर, मजहब या देवी – देवता को मानते हो । अगर आपके पास ईश्वर विश्वास की ताकत है तो आप इस दुनिया के सबसे खुशहाल व्यक्ति हो सकते है । क्योंकि जिसको ईश्वर में विश्वास होता है, उसी को ईश्वर की प्रेरणा होती है ।

पहली कहानी

आत्मा का संकेत – ईश्वर की प्रेरणा

एक बार एक बुढ़िया माथे पर कपड़े व गहनों की गठरी और साथ में छोटी सी बेटी को लेकर एक गाँव से दुसरे गाँव जा रही थी । चलते चलते वह कुछ ही दूर पहुँची होगी कि पीछे से एक घुड़सवार आया ।
घुड़सवार को अकेला देख बुढ़िया ख़ुशी से बोली – “ बेटा ! आज बहुत धुप है और गर्मी भी बहुत है, यदि तुझे कोई आपत्ति ना हो तो इस गठरी और मेरी बेटी को अपने घोड़े पर बिठाकर अगले गाँव छोड़ देगा ?”
घुड़सवार बोला – “ ना माई ! इतना वजन मेरा घोड़ा नहीं सं..
Posted By : Posted By seervi on 06 Aug 2019, 11:35:55
मैं बहुत आनंदित हुआ कि युवकों और विद्यार्थियों के बीच थोड़ी सी बात कहने को मिलेगी। युवकों के लिए जो सबसे पहली बात मुझे खयाल में आती है वह यह है, और फिर उस पर ही मैं और कुछ बातें विस्तार से आज आपसे कहूंगा।

जो बूढ़े हैं उनके पीछे दुनिया होती है, उनके लिए अतीत होता है, जो बीत गया वही होता है। बच्चे भविष्य की कल्पना और कामना करते हैं, बूढ़े अतीत की चिंता और विचार करते हैं। जवान के लिए न तो भविष्य होता है और न अतीत होता है, उसे केवल वर्तमान होता है। यदि आप युवक हैं तो आप केवल वर्तमान में जीने की सामथ्र्य से ही युवक होते हैं। यदि आपके मन में भी पीछे का चिंतन चलता है तो आपने बूढ़ा होना शुरू कर दिया। अगर अभी भी भविष्य की कल्पनाएं आपके मन में चलती हैं तो अभी आप बच्चे हैं।

युवा अवस्था बीच का एक संतुलन बिंदु है। मन की ऐसी अवस्था है, जब न कोई भविष्य होता है, और न कोई अतीत होता है। जब हम ठीक-ठीक वर्तमान में जीते हैं तो चित्त युवा होता है, यंग होता है, ताजा होता है, जीवित होता है, लिविंग होता है। सच यह है कि वर्तमान के अतिरिक्त और किसी की कोई सत्ता नहीं है। न तो अतीत की कोई सत्ता है, ..
Posted By : Posted By seervi on 04 Aug 2019, 05:23:43
🔹समाज सेवक बनना और नाराज होना दोनों चीजें साथ नहीं चल सकती है।
कारण समाज सेवा छोड़ो या नाराज होना छोड़ो...!

🔸मुझे मालूम था इसलिए में नहीं आया?

🔹मेरा फोटो नहीं छपा इस लिए में नही आया

🔸मेरा निमंत्रण पत्रिका में नाम नहीं था इस लिए में नहीं आया

🔹मुझे उसमे कुछ मिलने वाला नहीं था इसलिए में नहीं आया।

🔸मुझे कोई पद नहीं मिला इसलिए में नहीं आया।

🔹मुझे कोई सुनता नहीं है
इसलिए में नहीं आया

🔸मुझे स्टेज पे नहीं बिठाया इसलिए में नहीं आया।

🔹मेरा सम्मान नहीं किया इसलिए में नहीं आया।

🔸मुझे बोलने का मौका नहीं दिया इसलिए में नहीं आया

🔹कमेटी,अध्यक्ष मंत्री मेरे विरोधी है इसलिए में नहीं आया

🔸मेरे विचार सुझाव को बहुमत से उड़ा दीया जाता है इसलिए में नहीं आया।

🔹बार बार आर्थिक बोझ मुझ पर डाल दिया जाता है इसलिए में नहीं आया

🔸सभी काम मुझे सौंपा जाता है इसलिए में नहीं आया।

🔹नेता गण अपनी मनमानी करते है इसलिए में नहीं आया

🔸हिसाब देते नहीं है कोई सुझाव लेते नहीं है इसलिए में नहीं आया।

🔹टाइम नहीं मिल रहा इसलिए में नहीं आय..
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