सीरवी समाज - ब्लॉग

आलेख:-सीरवी समाज की अच्छाइयां-सबसे जुदा । - प्रतिभागी - 5 - नीता देवड़ा (इंदौर)
Posted By : Posted By seervi on 12 Sep 2019, 03:18:20

सीरवी समाज की अच्छाईयां - सबसे जुदा

सीरवी समाज की अच्छाईयां बताने के लिए समाज की उत्तपत्ति के बारे में बताने की कोई आवश्यकता नहीं है ।
सीरवी समाज की अच्छाईयां तो सीरवी समाज के कुल में पैदा हुए व्यक्ति के व्यवहार से पता चल जाती है
सीरवी समाज में कई ऐसी अच्छाईयां हे जो हमने कभी किसी समाज में न देखी होगी न सुनी होगी ।
" समाज की विशेषताये "
1) सरल व्यवहार - सीरवी बंधू का व्यवहार इतना सरल है कि दुनिया के किसी भी कोने में बैठा हो दुसरो के मान में अपने लिए जगह बना ही लेता है ।
2) सहायता - आज जमीन से उठा सीरवी ,समाज की सहायता के लिए ऑफिस खोल रहा है । परिवार के पालन , चिकित्सा का क्षेत्र , खेलकूद में या पढ़ाई के क्षेत्र में समाज से पैसा एकत्रित करके समाज की मदद के लिए आगे आया है ।
3) मेहनती - मेहनत का नाम सुन कर
ही किसान का चेहरा आँखों से गुजर जाता है । सीरवी तो जमीन से खड़ा हुआ है ,जमीन से खड़ा होना मतलब अन्न पैदा करना , चाहे कोई भी मौसम हो सर्दी , बारिश या कड़कती धुप सीरवी किसान खून पसीना एक करके परिवार का पालन पोषण करता हे ।सीरवी समाज की मेहनत का परिणाम ही आज उन्नति का शिखर छूना हे ।
4) संयुक्त परिवार - सीरवी समाज से आज संयुक्त परिवार में रहने की प्रेरणा मिलती है , सीरवी का मन इतना सरल होता है कि वो आपने बूढ़े माँ बाप के साथ आपने भाई बहन को साथ ले कर चलने पर जोर देता है ।परिवार के सभी सदस्यों के साथ तथा बच्चो के साथ समानता का व्यवहार करता है ।
5) बचपन से वडेर से जोड़ना तथा सामुदायिक व्यवस्था में शामिल होना - बचपन से बच्चो को वडेर में जाने के संस्कार सीरवी समाज की परम्परा रही है , माताजी का जन्मोउत्सव बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है ,व्यस्त जीवन होने के बाद भी युवा पीढ़ी भी अपना सहयोग सामाजिक कार्यक्रम में देती है ,एक दूसरे के सहयोग से सामाजिक गतिविधियां का संचालन होता है ।
6) रिवाजो में नशे का प्रचलन का बहिष्कार - सीरवी समाज के रिवाजो में नशे का बहिष्कार हुआ है कई समाजो में देखा जाता है कि लोग सामूहिक रूप से नशे का सेवन करते हे ,लेकिन सीरवी समाज में नशे के बहिष्कार की प्रथा है ,किसी भी सामाजिक कार्यक्रम में या किसी रिवाजो में नशे का सेवन नहीं किया जाता है ।
7) दहेज़ प्रथा - कई बार हम लोग सुनते हे की शादी के पहले ही दहेज़ की मांग की जाती है लेकिन आज तक सीरवी समाज में सुनने को नहीं मिला की किसी भी बहु को दहेज़ के लिए परेशान किया गया या जलाया गया या कही भी दहेज़ की मांग की गयी है । सीरवी समाज को दहेज़ मुक्त समाज कहा जा सकता है ।
8) महिला उत्पीड़न - सीरवी समाज में महिलाओं को पूर्ण आजादी दी गयी , सीरवी समाज की महिला शादी के बाद भी शिक्षा प्राप्त कर सकती है आपने कोई व्यवसाय भी शुरू कर सकती है स्कूलों में पढ़ा भी सकती और आजादी से कही भी आने जाने की अनुमति सीरवी महिला को दी गयी है किन्तु कही कही महिलाओं को घर से बहार निकलने की भी अनुमति नहीं होती है वो महिलाएं सिर्फ घर का काम करने के लिए बनी होती है और आपना पूरा जीवन मज़बूरी से गुजारने के लिए मजबूर हो जाती है इसतरह कई महिलाओं का जीवन नरक की तरह गुजरता है बल्कि सीरवी महिलाओं को समाज ही आगे आने के लिए प्रेरित करता है ।
9) विधवा विवाह - कई समजो में स्त्री के विधवा होने के बाद उसका जीवन उसे अकेले ही गुजरने की प्रथा होती है दूसरा विवाह कर लेने पर उसे समाज से बहार कर दिया जाता है लेकिन आज सीरवी समाज विधवा विवाह के लिए आगे आया है समाज ही विधवा को अपना नया जीवन निर्वाह करने की अनुमति देता है ।
10) पुत्र प्राप्ति - पुत्र प्राप्ति के लिए कई जगह पर पूजा पाठ की जाती है पुत्र न होने पर महिलाओं पर कई प्रकार के अत्याचार किये जाते हे लड़की का होना अशुभ माना जाता है लेकिन सीरवी समाज लड़की का पैदा हो घर में लक्ष्मी का आगमन होना मानता है सीरवी लड़की होने पर घरो में पूजा करवाता है सीरवी समाज में पैदा होने वाली लड़की आपने आप को भाग्यशाली समझती है ,लड़का लड़की में कोई भी भेदभाव नहीं किया जाता है ऐसी बहुत सी अच्छाईयां सीरवी समाज में भरी हुई है जिनका वर्णन मात्र एक निबंध से नहीं किया जा सकता है । मुझे सीरवी समाज में पैदा होना गर्वित महसूस करवाता है ।

आपकी बहन
नीता देवड़ा🙏