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मृत्युभोज - प्रस्तुति : नीता देवड़ा (इंदौर, मध्य प्रदेश)
Posted By : Posted By seervi on 12 Aug 2019, 03:50:49

मृत्युभोज
जब भी मृत्युभोज को बंद करने की बात होती है तो बहुत से लोग या हमारे बुजुर्गइस बात को लेकर बहुत से प्रश्न खड़े कर देते है कि क्या आपत्ति हैं मर्त्युभोज से
और सही भी हे की भला क्या आपत्ति है समाज के लोगो को मर्त्युभोज से
जिन लोगों को मर्त्युभोज से आपत्ति नहीं है वे लोग कहते हे की तुम लोग मर्त्युभोज बंद करने के बजाय अपना जन्मदिन मत मनाओ,होटलो में खाना मत खाओ,घूमने में पैसा खर्च मत करो या शादी में भी खर्च मत करो ऐसे बहुत से प्रश्न खड़े कर दिए जाते हैं
लेकिन एक प्रश्न यह भी हे की जन्मदिन साल में एक दिन का होटलो में खाना महीनो में कभी ,घूमने में पैसा खर्च ज्यादा तर फॅमिली के साथ ही होता है और शादी भी 2 या 3 दिन की पहले के समय में शादी 8,10 या 15 दिन की भी होती थी,लेकिन अब समय की कमी होने के कारण शादिया भी सिमट कर 3 ,2 या 1 दिन की ही रह गयी है । अब बात आती है मृत्युभोज की मृत्युभोज 1 दिन का ,2 दिन का ,3 दिन का ,4 दिन का ,5 दिन का 6 दिन का , 7 दिन का ,8 दिन का ,9दिन का , 10 दिन का ,11 दिन का नहीं 12 दिन का होता है और सबसे बड़ा खर्च भी मर्त्युभोज में ही होता होगा । प्रश्न तो यहाँ होना चाहिए की यदि शादी 12, 15 दिनों से कम हो कर 3, 2 या 1 दिन की हो सकती है तो मृत्युभोज के दिन 12 दिनों से कम हो कर 3 दिन क्यों नहीं हो सकते ,मेरा उन आपत्ति लेने वाले लोगो से निवेदन हे कि मृत्युभोज बंद नहीं हो सकता है तो उसके दिनों को तो कम किया जा सकता है।
मेरा हर सीरवी समाज के बंधू से ये निवेदन हे की जीते जी इस बात का प्रण ले ले की मेरा मृत्युभोज 3 दिन का होगा तो शायद 12 दिन का मृत्युभोज सिमट कर 3 दिन का हो सकता है और इसी में समाज की भलाई भी हे🙏🙏

नीता देवड़ा