सीरवी समाज - मुख्य समाचार

Posted By : 07 Sep 2026 दुर्गाराम पंवार चेतबंदे पत्रिका वरिष्ठ सहायक संपादक बेंगलुरू कोयंबत्तूर

प्रेरणा दायक संदेश सीरवी समाज के गौरव श्री धर्मीचंद मुलेवा की विशेष कवरेज

*मारवाड़ की मिट्टी से सिंगापुर तक*
*भारत की अंडर-19 और रणजी ट्रॉफी टीम के क्रिकेटर से लेकर SEA Games के स्वर्ण पदक विजेता और SportyGo के संस्थापक तक — श्री धर्मीचंद मुलेवा की प्रेरणादायक यात्रा*
को चेत बंदे पत्रिका परिवार की ओर से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं
प्रस्तुति:दुर्गाराम पंवार, वरिष्ठ सहायक संपादक,चेत बांदे पत्रिका
मारवाड़ की मिट्टी से निकलकर अंतरराष्ट्रीय खेल जगत तक पहुंचना किसी भी युवा के लिए आसान नहीं होता। लेकिन जब जुनून, अनुशासन और दृढ़ संकल्प एक साथ मिलते हैं, तो सीमाएं धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं। श्री धर्मीचंद मुलेवा की यात्रा इसी विश्वास का जीवंत उदाहरण है।
*राजस्थान के देवरिया गांव, बेरा रामर,तहसील जैतारण, जिला ब्यावर में एक किसान परिवार में जन्मे धर्मीचंद ने क्रिकेट और खेल को अपने जीवन का केंद्र बना लिया। भारत की अंडर-19 टीम का प्रतिनिधित्व करने और रणजी ट्रॉफी क्रिकेट खेलने के बाद उन्होंने सिंगापुर में अपने करियर का एक नया अध्याय शुरू किया और अंततः सिंगापुर की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के सदस्य बने।*

2017 के कुआलालंपुर SEA Games में उन्होंने सिंगापुर का प्रतिनिधित्व करते हुए T20 क्रिकेट में स्वर्ण पदक और 50 ओवर के प्रारूप में रजत पदक जीता तथा अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर अपनी पहचान स्थापित की।

*हालांकि, सिंगापुर क्रिकेट में उनका योगदान केवल एक खिलाड़ी के रूप में ही नहीं रहा। उन्होंने सिंगापुर क्रिकेट एसोसिएशन के जनरल मैनेजर के रूप में भी कार्य किया और बाद में खेल उद्यमिता की ओर कदम बढ़ाते हुए अपना स्वयं का खेल व्यवसाय स्थापित किया।*
आज धर्मीचंद केवल एक पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर ही नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक, खेल उद्यमी और SportyGo के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक हैं। उनके नेतृत्व में SportyGo भारत और सिंगापुर के बीच खेल प्रतिभाओं के लिए नए अवसर पैदा करने की दिशा में काम कर रहा है।
SportyGo अब केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं है। संस्था क्रिकेट,फुटबॉल, वॉलीबॉल,बैडमिंटन,कबड्डी, सेपक टकरॉ,बास्केटबॉल, पिकलबॉल और कई अन्य खेलों में भी कार्यक्रम संचालित करती है। इसके अलावा,सिंगापुर में प्रवासी श्रमिकों के लिए भी विभिन्न खेलों के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं,जिससे उन्हें नियमित रूप से खेलों में भाग लेने, प्रतिस्पर्धा करने और सामुदायिक स्तर पर जुड़ने के अवसर मिलते हैं।
*मारवाड़ से शुरू हुई क्रिकेट यात्रा*
*श्री धर्मीचंद मुलेवा का बचपन राजस्थान में बीता। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, उनका जन्म 4 अप्रैल 1984 को पाली, राजस्थान में हुआ था।*
किसान श्री देवाराम जी मुलेवा के परिवार में जन्मे धर्मीचंद ने बचपन से ही क्रिकेट के प्रति गहरी रुचि विकसित कर ली थी।
संसाधन सीमित हो सकते थे, लेकिन उनके सपने बड़े थे। क्रिकेट में अपना करियर बनाने के दृढ़ संकल्प ने उन्हें राजस्थान के खेल मैदानों से भारत की घरेलू क्रिकेट की सर्वोच्च प्रतियोगिताओं तक पहुंचाया।
*भारत की अंडर-19 टीम से रणजी ट्रॉफी तक*
प्रतिभा,अनुशासन और कड़ी मेहनत के दम पर धर्मीचंद को भारत की अंडर-19 टीम का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला। इसके बाद उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में प्रवेश किया और कर्नाटक का प्रतिनिधित्व किया।
*2001 में उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ भारत अंडर-19 टीम का प्रतिनिधित्व किया और प्रमुख विकेट लेने वाले गेंदबाजों में शामिल रहे। इसी दौरान उन्होंने इंग्लैंड अंडर-19 के खिलाफ तीन दिवसीय मुकाबले में 12 विकेट लेने का शानदार प्रदर्शन किया।*
8 नवंबर 2000 को उन्होंने कर्नाटक की ओर से तमिलनाडु के खिलाफ प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया। 2000 से 2002 के बीच उन्होंने प्रतिष्ठित रणजी ट्रॉफी में कर्नाटक का प्रतिनिधित्व किया।
*मुख्य रूप से ऑफ-स्पिन गेंदबाज के रूप में पहचाने जाने वाले धर्मीचंद ने बल्ले से भी उपयोगी योगदान दिया और खुद को एक सक्षम घरेलू क्रिकेटर के रूप में स्थापित किया।*
रणजी ट्रॉफी तक पहुंचना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी। लेकिन धर्मीचंद की यात्रा यहीं समाप्त नहीं हुई। यह तो उनके बड़े सफर की केवल एक महत्वपूर्ण सीढ़ी थी।
*सिंगापुर में एक नए अध्याय की शुरुआत*
धर्मीचंद लगभग 2002–2003 में सिंगापुर चले गए और 2004 में सिंगापुर की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बने।
*एक नए देश में खुद को क्रिकेटर के रूप में स्थापित करना आसान नहीं था। लेकिन उनके अनुभव, अनुशासन और निरंतर प्रयासों ने उन्हें सिंगापुर क्रिकेट में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया।*
विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद करने की उनकी क्षमता भी उनकी एक बड़ी ताकत बनी।वे अंग्रेजी,हिंदी,तमिल, कन्नड़,मारवाड़ी और अन्य भाषाओं में दक्ष हैं। इस कारण वे भारत और सिंगापुर के विविध सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवेश से आने वाले खिलाड़ियों, अभिभावकों, प्रशिक्षकों और संस्थानों के साथ प्रभावी ढंग से जुड़ सके।
SEA Games 2017 — एक स्वर्णिम अध्याय
*श्री धर्मीचंद मुलेवा के क्रिकेट करियर का एक सबसे गौरवपूर्ण अध्याय 2017 के कुआलालंपुर SEA Games में लिखा गया।*
सिंगापुर का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने T20 प्रारूप में स्वर्ण पदक और 50 ओवर के प्रारूप में रजत पदक जीता।
*सिंगापुर के अभियान में उनकी गेंदबाजी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। वियतनाम के खिलाफ 3/4 और थाईलैंड के खिलाफ 5/35 के शानदार गेंदबाजी आंकड़ों ने टीम के प्रदर्शन को मजबूत किया और पदक जीतने के अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।*

जो खिलाड़ी कभी कर्नाटक की ओर से रणजी ट्रॉफी में खेला था, वही अब अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर सिंगापुर के लिए पदक जीत रहा था।
यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं थी। यह मारवाड़ की मिट्टी से शुरू हुए वर्षों के अनुशासन, संघर्ष, त्याग और दृढ़ संकल्प की सफलता थी।
*क्रिकेट से खेल उद्यमिता तक — SportyGo का जन्म*
2017 में सिंगापुर में धर्मीचंद ने SportyGo की स्थापना की। उनकी सोच पारंपरिक क्रिकेट कोचिंग से कहीं आगे की थी।
*उनका उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना था, जहां जमीनी स्तर की खेल प्रतिभाओं को उच्च गुणवत्ता का प्रशिक्षण, प्रतिस्पर्धात्मक अनुभव और आगे बढ़ने के लिए सही मार्गदर्शन मिल सके।*
आज SportyGo एक बहु-खेल संगठन के रूप में विकसित हो चुका है, जो सिंगापुर और एशिया के विभिन्न हिस्सों में जमीनी स्तर पर क्रिकेट और अन्य खेलों को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रहा है।
SportyGo की प्रमुख गतिविधियां
*1.कोचिंग अकाडमी*
सिंगापुर और मैसूर, कर्नाटक में बच्चों से लेकर वरिष्ठ स्तर के खिलाड़ियों तक के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं। इनमें स्पिन गेंदबाजी कैंप,बल्लेबाजी मास्टरक्लास, फिटनेस कार्यक्रम और अन्य विशेष खेल प्रशिक्षण शामिल हैं।
*2. टूर्नामेंट आयोजन*
SportyGo द्वारा जूनियर लीग और विभिन्न आयु वर्ग के ओपन टूर्नामेंट सहित कई खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। इससे खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धात्मक अनुभव प्राप्त होता है और उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है।
*3.स्कूल और संस्थागत सहयोग*
DPS International School तथा सिंगापुर के अन्य स्थानीय स्कूलों के साथ मिलकर जमीनी स्तर के खेल कार्यक्रम विकसित किए गए हैं।
*धर्मीचंद श्री सी.पी.काबरा, जो DPS International School के चेयरमैन हैं और स्वयं राजस्थान से संबंध रखते हैं, के महत्वपूर्ण सहयोग को भी विशेष रूप से स्वीकार करते हैं। SportyGo के साथ सहयोग स्थापित करने तथा स्कूल में विभिन्न खेल कार्यक्रमों और खेल संस्कृति को विकसित करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।*

इन पहलों के माध्यम से युवा खिलाड़ियों को कम उम्र से ही व्यवस्थित प्रशिक्षण और प्रतियोगितात्मक अनुभव प्राप्त करने के अवसर मिल रहे हैं।
4. सामुदायिक विकास
*SportyGo द्वारा सिरवी समुदाय के खिलाड़ियों और युवाओं को भी प्रशिक्षण एवं खेल के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य युवा खेल प्रतिभाओं की पहचान करना और उन्हें आगे बढ़ाना है।*
*भाई के साथ मिलकर खेल यात्रा को आगे बढ़ाना*
धर्मीचंद के भाई श्री प्रकाशचंद जी मुलेवा SportyGo Mysore के सह-संस्थापक हैं और पिछले कई वर्षों से मैसूर अकादमी के संचालन में सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं।
*दोनों भाई मिलकर भारत और सिंगापुर के युवा खिलाड़ियों को उच्च स्तर का प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और खेल के अवसर उपलब्ध कराने का कार्य कर रहे हैं।*

एक किसान परिवार से आने वाले इन दोनों भाइयों ने खेल को केवल व्यक्तिगत करियर तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे अगली पीढ़ी के लिए अवसर पैदा करने का माध्यम बना दिया है।
*महिला क्रिकेट पर विशेष ध्यान*
*धर्मीचंद मुलेवा की खेल यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू महिला क्रिकेट को बढ़ावा देने की उनकी प्रतिबद्धता भी है।*
सुश्री उषा परेरिया,जो रणजी स्तर की क्रिकेटर और सिरवी समुदाय की प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं,को कई अवसरों पर सिंगापुर आमंत्रित किया गया।उन्हें आवश्यक सहयोग, उच्च स्तर की क्रिकेट कोचिंग और अन्य देशों की टीमों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मैचों में खेलने के अवसर प्रदान किए गए।
*इसी प्रकार,11 वर्षीय निश्का मुलेवा का KSCA अंडर-15 टीम के लिए चयन भी युवा महिला क्रिकेट प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के प्रयासों का एक उदाहरण है।*
इन पहलों का उद्देश्य केवल प्रतिभा की पहचान करना नहीं है, बल्कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को सही वातावरण, प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है।

*सैकड़ों युवा खिलाड़ियों के मार्गदर्शक*
धर्मीचंद का मानना है कि क्रिकेट प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है उस प्रतिभा को पहचानने, विकसित करने और उसे सही मंच प्रदान करने की।
*उनके मार्गदर्शन में सैकड़ों बच्चों ने प्रतिस्पर्धात्मक और पेशेवर क्रिकेट की दिशा में अपने पहले कदम बढ़ाए हैं। इनमें से कई खिलाड़ी आगे चलकर सिंगापुर की अंडर-16, अंडर-19 और राष्ट्रीय टीम स्तर पर प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।*

यहीं एक व्यक्तिगत क्रिकेटर की सफलता का अर्थ और भी बड़ा हो जाता है।
*धर्मीचंद की यात्रा यह दर्शाती है कि एक खिलाड़ी की व्यक्तिगत उपलब्धि को पूरे खेल समुदाय के लिए अवसरों में बदला जा सकता है।*
*भारतीय और सिंगापुर क्रिकेट के बीच सेतु का निर्माण*
*2026 तक, धर्मीचंद SportyGo के प्रबंध निदेशक के रूप में कार्यरत हैं और सिंगापुर तथा मैसूर, दोनों स्थानों पर अकादमी संचालन की देखरेख करते हैं।*
वे विभिन्न संस्थाओं और संगठनों के सहयोग से खेल विकास कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। साथ ही, वे भारत और सिंगापुर के बीच क्रिकेट एक्सचेंज कार्यक्रमों को मजबूत करने की दिशा में भी काम कर रहे हैं।
*उनका काम केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं है। SportyGo सिंगापुर में विभिन्न सरकारी एवं खेल संस्थाओं, एजेंसियों और समुदायों के लिए बहु-खेल कार्यक्रम भी संचालित करता है।*
जूनियर खिलाड़ियों के मार्गदर्शक के रूप में धर्मीचंद का अनुभव उन युवाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो खेल को केवल शौक के रूप में नहीं, बल्कि गंभीर करियर के रूप में अपनाना चाहते हैं।
पांच भाषाएं,एक मिशन
*अंग्रेजी, हिंदी, तमिल, कन्नड़, मारवाड़ी और अन्य भाषाओं में संवाद करने की क्षमता ने धर्मीचंद को विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आने वाले खिलाड़ियों और परिवारों के साथ जुड़ने में सक्षम बनाया है।*
मारवाड़ से कर्नाटक और फिर सिंगापुर तक की उनकी यात्रा केवल भौगोलिक यात्रा नहीं है।
*यह विभिन्न संस्कृतियों को जोड़ने, खेल के अवसर पैदा करने और प्रतिभाओं को एक साथ लाने की यात्रा भी है*।

_*“प्रतिभा हर जगह है…”*
मैदान पर अनुशासन और प्रशिक्षण के प्रति पेशेवर दृष्टिकोण धर्मीचंद की कार्यशैली की प्रमुख विशेषताएं हैं।
*उनकी खेल दर्शन को एक विचार में समेटा जा सकता है*:
“प्रतिभा हर जगह है; जरूरत है सही कोचिंग और सही अवसर की।”*
यही विचार उनके पूरे क्रिकेट करियर और SportyGo के माध्यम से किए जा रहे कार्यों में दिखाई देता है।
*मारवाड़ के युवाओं के लिए प्रेरणा*
धर्मीचंद मुलेवा की कहानी यह साबित करती है कि सफलता के लिए किसी बड़े शहर या विशेषाधिकार प्राप्त पृष्ठभूमि से आना जरूरी नहीं है।
१/एक किसान का बेटा रणजी ट्रॉफी स्तर तक पहुंच सकता है,अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दूसरे देश का प्रतिनिधित्व कर सकता है,SEA Games में स्वर्ण पदक जीत सकता है, खेल प्रबंधन और उद्यमिता में अपना मुकाम बना सकता है और फिर अपने अनुभव को अगली पीढ़ी के सपनों को पूरा करने में लगा सकता है।
२/इसलिए देवरिया गांव से सिंगापुर तक का सफर केवल श्री धर्मीचंद मुलेवा की व्यक्तिगत सफलता की कहानी नहीं है।
३/यह मारवाड़ की मेहनत, सिरवी समुदाय की प्रतिभा, खेल की शक्ति और भारतीय खेल भावना की कहानी है।
४/उनकी यात्रा आने वाली पीढ़ियों को एक शक्तिशाली संदेश देती है:
सपने बड़े या छोटे नहीं होते; उन्हें पूरा करने का दृढ़ संकल्प मायने रखता है।
जहां प्रतिभा है,वहां अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
और जब सफलता मिल जाए, तो सबसे बड़ी उपलब्धि अगली पीढ़ी के लिए रास्ता तैयार करना है।