सीरवी समाज - मुख्य समाचार

*शिक्षाविद, सदैव हँसमुख, एक सफल योग शिक्षक,सौम्य स्वभाव,मेहनती,दयालु,मिलनसार, धर्म और अध्यात्म से जुड़ी प्रतिभा सुश्री शीतल परमार (सीरवी)
Posted By : 10 May 2022, दुर्गाराम पंवार कोयम्बटूर

मध्यप्रदेश/
*सीरवी समाज की होनहार प्रतिभा*
*शिक्षाविद, सदैव हँसमुख, एक सफल योग शिक्षक,सौम्य स्वभाव,मेहनती,दयालु,मिलनसार, धर्म और अध्यात्म से जुड़ी प्रतिभा सुश्री शीतल परमार (सीरवी)*
किसी ने क्या खूब कहा है-
स्वयं को बदलो तो यह जग बदलेगा ...
योग हमारी कमियों पर प्रकाश डालता है ...
योग का मतलब है जोड़ना, खुद में ऊर्जा को समाहित करना ...
योग संगीत की तरह है ...
रोगमुक्त जीवन जीने की हो चाहत ...
जो करेंगे योग, नही छुएंगे उन्हें फिर कोई रोग। ...
नहीं होती है उनको बीमारी, जो योग करने की करते समझदारी ...
योग का नारा है, भविष्य अब हमारा है
इसी जज्बे और आत्मविश्वास ,संघर्ष ,कड़ी मेहनत से भरी हुई बहुमुखी प्रतिभा की धनी है प्रतिभा सुश्री शीतल परमार सीरवी एक सफल योग शिक्षक और अपनी ओजस्वी वाणी से किसी को भी प्रभावित करने की क्षमता रखने वाली *सुश्री शीतल परमार का जन्म मध्यप्रदेश बड़वानी जिले के गांव रेहगुन में दिनांक 27-11-1998 को श्रीमान बाबूलालजी माता श्रीमती निर्मला के घर में हुआ।*
सुश्री शीतल परमार का जन्म एक कृषक परिवार में हुआ।परिवार में मातापिता के अतिरिक्त बड़े भाई श्री अश्विन एवं भाभी श्रीमती रीना और भतीजा हर्षद है।
*शिक्षा* प्रारंभिक शिक्षा- सरस्वती शिशु मंदिर तलवाड़ा बुजुर्ग मध्यप्रदेश से हुई। व माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा-राजकुमार खंडेलवाल स्मृति हायर सेकंडरी स्कूल बड़वानी मध्यप्रदेश से की।
*आपने स्नातक-B.SC.(Biotechnology).शहीद भीमानायक स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बड़वानी मध्यप्रदेश से की।*
*आपने योग शिक्षा-वशिष्ठ योग आश्रम, अहमदाबाद गुजरात से किया*।

*रुचि* सुश्री शीतल परमार को बचपन से ही पुस्तकें पढ़ने में गहरी रुचि रही जिसका पूर्ण रूप से श्रेय इनकी मां को जाता है जिनका सदैव सहयोग रहा।आप अध्यात्म और संस्कृति को जानने की इच्छा का कारण भी माँ है। इसके अतिरिक्त आप एक प्रकृति प्रेमी है व इनको प्रकृति से अंनत प्रेम है और इसी कारण कॉलेज के पश्चात फोटोग्राफी की अब भी नेचर फोटोग्राफर है।

*योग यात्रा*
ग्रेजुएशन के पश्चात कुछ कार्य किए किन्तु वे संतोष नहीं दे पाए, ऐसा लगता था कि कुछ और करना चाहिए जो मेरे स्वभाव से मेल खाए। बचपन से ही एकांत प्रिय रही है, किन्तु मन में सदा से था कि कुछ तो अलग करना है, नौकरी नहीं करना है। यह नौकरी न कर स्वयं का कार्य करने का और न डरने के गुण इनके पिता से प्राप्त हुए है।
2019 में आपने ध्यान स्वास्थ्य की ओर गया और आपने आभास हुआ की स्वास्थ्य पर ध्यान देना कितना आवश्यक है।
2019 में आपने घर पर ही व्यायाम करना प्रारंभ किया। धीरे-धीरे भोजन के महत्व को समझा उसमें सही बदलाव किया।
प्रथम लाॅकडाउन तक आपने वर्कआउट, व्यायाम, सुर्यनमस्कार के साथ कुछ आसन भी करना शुरु किए। आसनों को करते-करते एवं उनसे हुए लाभों को देखते हुए योग के बारे में और अधिक जानने की इच्छा हुई। योग के बारे में स्वयं अध्ययन किया। योग के बारे में आप योग शिक्षक बन गए। आप वर्तमान में योगिनी द नाईट पेज के माध्यम से ऑनलाइन कक्षाएं ले रही है।जिससे युवाओं बहुत लाभ मिल रहा है, जल्द ही आप समाज जनहित में स्वास्थ्य के प्रति, योगाभ्यास कैसे किया जाता है उसके लिए आप जागरूक करने के हेतु आप बताएगी।
कहते है योग का जन्म भगवान् शिव से हुआ है। जब मानव धरती पर आया तो सबसे बड़ी समस्या यही थी कि यह संसार तो मरणशील है ही साथ ही यहाँ कई बीमारियां है।
योग से हम रोग मुक्त जीवन जीते हैं। मन को भी शुद्ध करते हैं। मन की शुद्धि का एक मात्र माध्यम योग ही है। जैसे पानी शरीर की शुद्ध करता है ठीक योग व ध्यान भी वैसे ही मन की शुद्धि करता है।
तन की ऊर्जा को बढ़ा दे वह है योग, जीवन को सुखमय बना दे वह है योग. अगर चाहते है आपके शरीर से दूर रहे रोग, तो सुबह-सुबह आप आदत डाले करने की योग।

होनहार प्रतिभा सुश्री शीतल परमार सीरवी को चेतबंदे पत्रिका परिवार/राष्ट्रीय सीरवी किसान सेवा समिति परिवार/सीरवी समाज डॉट कॉम परिवार व अखिल भारतीय सीरवी समाज की ओर से आपको बहुत बहुत हार्दिक बधाई व उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं।आप पर पूरी समाज को गर्व है बिटियाँ राणी।
प्रस्तुति:-दुर्गाराम पंवार कोयम्बटूर तमिलनाडु।