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समाज सेवा, सौम्य स्वभाव, हँसमुख,मिलनसार, धर्म और अध्यात्म से जुड़ी प्रतिभा प्रभा चौधरी (सीरवी)
Posted By : Manohar Seervi 06 Apr 2021, 12:23:39

सीरवी समाज की होनहार प्रतिभा

समाज सेवा, सौम्य स्वभाव, हँसमुख,मिलनसार, धर्म और अध्यात्म से जुड़ी प्रतिभा प्रभा चौधरी (सीरवी)
किसी ने क्या खूब कहा है-

\" जिसने भी खुद को खर्च किया है,
दुनिया ने उसी को गूगल पर सर्च किया है
अगर आप खुद ही खुद पर भरोसा नहीं करोगे तो ,कोई और क्यो करेगा ।\"

इसी जज्बे और आत्मविश्वास से भरी हुई बहुमुखी प्रतिभा की धनी है प्रतिभा प्रभा सीरवी । सरल स्वभाव और अपनी ओजस्वी वाणी से किसी को भी प्रभावित करने की क्षमता रखने वाली प्रभा सीरवी का जन्म पाली जिले में दिनांक 22-8-1989 को श्री मान वोरारामजी सिरवी व माता श्रीमती पदमा देवी के घर में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा बालिया बालिका विद्यालय से तथा सिनियर सैकेण्डरी  सेठ रतनचन्द लोढ़ा बाल निकेतन स्कुल से की। तत्पश्चात B.A व M.A की शिक्षा बांगड़ महाविद्यालय पाली से पूर्ण की। घर में पिता वोरारामजी, छोटा भाई विकास, व भाभी स्वेता सभी फ़ार्मासिस्ट है प्रभा के पिता इसे भी इसी फील्ड में ले जाना चाहते थे परन्तु प्रभा को पढ़ना और बच्चों को पढ़ाना ज्यादा पसंद था। इसलिए इन्होंने सन् 2011 मे सरस्वती शिक्षण संस्थान से हिन्दी साहित्य मे B.ed किया।
माँ आईजी व सभी बड़ो के आशीर्वाद से इन्होंने 70% प्रतिशत अंकों से B.ed  पुर्ण की। शिक्षक के तौर पर विधालय में अध्यापन भी करवाया। सन् 2013 में इनका विवाह श्री मान चौथारामजी सीरवी के सुपुत्र राजेन्द्र सिरवी से हो गया।

संगीत का सफर-

\"कई जीत बाकी है, कई हार बाकी है,
अभी तो जिन्दगी का सार बाकी है।
यहाँ से चले नई मंजिल के लिए,
यह तो एक पन्ना था, अभी तो पुरी किताब बाकी है।\"

बचपन से ही माँ के लाड़-प्यार में पली प्रभा सीरवी धार्मिक और आध्यात्म से जुड़ी है। माता श्रीमती पदमा देवी सदैव भजन गाते रहते उन्ही के साथ गुनगुनाया करती। माँ जब भी कहीं कथा में जाते तो वे कहती की आप इतने लम्बे समय कैसे बैठे रहते हो क्या आनंद आता है तो उनकी माँ ने कहा एक दिन चलकर देख। फिर क्या था रविवार के अवकाश के दिन वे भी अपनी माँ के साथ गई। वहां कथा सुनते-सुनते उन्हे इतना आनंद आया की कथा समाप्ती के पश्चात वे स्वयं उठीं और आगे जाकर गाने लगी \" थारो लेखों लेवेला राई -राई रो\"जो की उसी दिन  की कथा से जुड़ी ।यहां से शुरू होता है इनके भजन गाने व लिखने का सिलसिला जिसकी कड़ी में इन्होंने कई भजन लिखें व गाए। जिसमें- शिव शंकर है ,अवतारी,
बुलावा आयो माताजी, लम्बिया नगर मे आवो आजमाता,
घरे पधारो आशापूरा मा, माताजी माने बिलाडा बुलादो सा, और गीता का ज्ञान  सुनाया आदि कई  भजन है।
स्कूली शिक्षा में भी ये जिला स्तर पर गायन में प्रथम स्थान प्राप्त कर चुकी हैं।
हाल ही में अध्यात्म व सनातन धर्म से वर्तमान पीढ़ी को जोड़ने के लिए गीता का ज्ञान भजन गाया।नारी शक्ति शिक्षित हो और वर्तमान पीढ़ी शिक्षा के साथ-साथ धर्म से जुड़ी रहे यही इनकी इच्छा है।इसी के साथ इन्होंने हँसते ओर हँसाते रहने के लिए अभिनय भी किया। सभी को पुण्य कार्यो का महत्व समझाने के लिए\" पुण्य कि परिभाषा \" नामक शार्ट फिल्म भी बनाई। इनकी लेखनी व गायन अभी निरन्तर ज़ारी है।आज भी होनहार प्रतिभा प्रभा सीरवी का सपना है कि समाज की जितनी भी प्रतिभा सांस्कृतिक से जुड़ी उन्हें आगे आना चाहिए और समाज का एक बड़ा प्लेटफार्म होना चाहिए ताकि सब प्रतिभाओ को सांस्कृतिक विषय मे आगे बढ़ने का अवसर प्रदान हो।
होनहार प्रतिभा प्रभा सीरवी को चेतबंदे पत्रिका परिवार/राष्ट्रीय सीरवी किसान सेवा समिति परिवार/सीरवी समाज डॉट कॉम परिवार व सम्पूर्ण सीरवी समाज की ओर से आपको बहुत बहुत हार्दिक बधाई व उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं।
प्रस्तुति:-दुर्गाराम पंवार सीरवी कोयम्बटूर तमिलनाडु