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सिर्वी समाज के पांच जांबाज डॉक्टर सिपाही घंटों अपनी सेवा दे कर,कोरोना रूपी युद्ध से लड़ रहे।
Posted By : Manoj Seervi Kag 2 May 2020, 05:01:00

विनोद सिर्वी धुलेट(धार)।वैश्विक महामारी कोरोना से इन दिनों पूरा देश जूझ रहा है। वहीं मध्य प्रदेश का धार जिला रेड जोन में आता है। देशव्यापी लॉकडाउन में चिकित्सक, पुलिस, प्रशासन सहित कई लोग इस मुश्किल की घड़ी में कोरोना वारियर्स बनकर कोरोना से जंग लड़ रहे हैं। इसी तरह राजगढ़ क्षेत्र के तिन गांव के दो पांच सिर्वी समाज के किसान पुत्र धार में कोरोना वॉरियर्स के रूप में अपनी सेवा दे रहे हैं। पांचों डॉक्टर को शासन के द्वारा आयुष चिकित्सा अधिकारी के पद पर अस्थाई नियुक्ति प्रदान की गई हैै। धार में कोरोना संक्रमित क्षेत्र में लोगो सेवा कर रहें। राजगढ़ समिपस्थ गांव अमोदिया के दो किसान पुत्र डॉक्टर नानू चौधरी व डॉ अशोक लछेटा, गांव पिपरनी के डॉ. अशोक सतपुड़ा, डॉ दयालु पडियार व गुमानपुरा के डॉ पुखराज परवार इन दिनों धार के भोज हॉस्पिटल में अपनी सेवा प्रदान कर रहें हैं। पांचों किसान पुत्र है और इनका मध्यमवर्गीय परिवार अपने बेटों की संकट की घड़ी में इस सेवा पर गर्व कर रहा है। हम किसान पुत्रो की आज आपको इनसाइड स्टोरी बताने जा रहे है। जिससे आप भी इन दोनों के हौसलों को सलाम कर इनपर गर्व करेंगे। जब हमने इन किसान पुत्र डॉक्टर से चर्चा की तो सभी ने एक ही बात कही की हर हाल में हम कोरोना पर विजय प्राप्त करेंगे और एक बार फिर मुस्कुराएगा इंडिया...
गांव अमोदिया के डॉ नानु चौधरी की आयुष चिकित्सा अधिकारी धार के रूप में अस्थाई नियुक्त होने की सूचना मिली तो उन्होंने यह बात अपने पिताजी को बताई। तब चौधरी के पिता बाबूलाल चौधरी ने कहा कि देश पर यदि कोई विपदा आ जाए तो सबसे बड़ा धर्म यही है कि संकट के समय में देश के लिए तन, मन, धन के साथ खड़े होना।उनकी इच्छा थी कि उनका लड़का भारतीय सेना में जाए। परंतु कुछ कारण से वह सपना पूरा नहीं हुआ। और डॉक्टर बनकर आज देश की सेवा करने का उनका सपना पूरा हो चुका है। आज कोरोना वायरस के साथ जंग छिड़ी है। जिसमें सैनिक के रूप में डॉक्टर अपने सेवाएं दे रहे हैं। कोरोना के साथ जंग में जीत होगी। डॉ चौधरी की पत्नी अनिता चौधरी शासकीय कन्या हाई सेकेंडरी स्कूल राजगढ़ मे शिक्षिका के रूप में पदस्थ हैं।

वही ग्राम पिपरनी के डॉ दयालु पडियार भी कोरोना के साथ जंग में अपनी सेवाएं भोज हॉस्पिटल में दे रहे हैं। डॉक्टर दयालु बताते हैं कि यह समय देश की सेवा का है। एक बार पीपीई किट पहनने के बाद ना तो पानी पिया जा सकता है और ना ही खाना खाया जा सकता है। परंतु ना तो भूख लगती है। और ना ही प्यास। बस एक ही जुनून रहता है। कि कोरोना हारे और हम जीते मुझे अपने आप पर गर्व होता है। कि भगवान ने मुझे देश की सेवा के काबिल बनाया डॉ पडियार टांडा में अपना क्लीनिक संचालित करते थे। शाम को घर आने पर पति पत्नी दोनों साथ में खाना खाते थे। आज 8 दिन हो गए। शाम को होटल जाकर पत्नी से वीडियो कॉलिंग कर बात करता हूं तभी पत्नी खाना खाती है। उनकी पत्नी निकिता सोलंकी बताती है। जब कहीं से खबर आती है कि कोरोना की जंग में डॉक्टर , पुलिस, सफाई कर्मी शहीद हुए तो गांव के लोग मुझे कहते हैं। कि तू अपने पति को घर बुला ले परंतु मुझे पूर्ण विश्वास है। कि कोरोना की जंग में हमारी जीत होगी।

गांव पिपरनी के डॉ दिलीप सतपुड़ा भी भोज हॉस्पिटल धार में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।दिलीप सतपुड़ा बताते हैं कि हमें यहां बहुत गर्व हो रहा है।एक डॉ का कर्तव्य दूसरे लोगों की स्वास्थ्य ठीक करना है। और हम कोरोना वायरस रूपी जंग में पीछे नहीं हटेंगे। जैसे सैनिक का युद्ध से इंकार करना वैसा ही है, जैसे एक किसान बीज बोने से इंकार कर दे, जैसे एक व्यापारी व्यापार करने से मना कर दे या एक शिक्षक शिक्षा देने से इंकार कर दे। हमारा जो भी काम होगा, अगर हम उससे पीछे हटेंगे, तो समाज का क्या होगा?
गुमानपुरा के डॉ. पुखराज बोले - पीपीई किट पहनते ही खुद पर होता है गर्व
धार में कोरोना संक्रमित क्षेत्र में लोगो के उपचार में कार्यरत ग्राम गुमानपुरा डॉ. पुखराज परवार धार की एक होटल में ठहरे है डॉ. पुखराज ने बताया कि जैसे ही हॉस्पिटल पहुँचकर पीपीई किट पहनता हू तो खुद पर गर्व होता है। कि इस घड़ी में देश के काम आ रहा हुं। ड्यूटी के लिए निकलते है तो लगता है मानो कोरोना रूपी दुश्मन से लड़ने के लिए हम पीपीई किट रूपी वर्दी पहनकर तैयार है। कोरोना संक्रमित क्षेत्र में लोगो का उपचार कर उन्हें घर पर रहने की सलाह देते है साथ हिम्मत भी देते हैं। डॉ. पुखराज ने बताया कि वे रोज अपने बड़े भाई (बाबूलाल परवार जोकि एक युवा समाजसेवी है) से बात करते हैं। जिससे उन्हें काफी हौसला मिलता है। एवं उनके द्वारा काफी मोटिवेट भी किया जाता हैं। मरीजो का उपचार कर वापस होटल आकर अपने घर वाले एवं बेटी से वीडियो कॉल के माध्यम से उनका हाल चाल जानते हैं। वही उनकी पत्नी रोशनी ने बताया कि मेरे पति को देश की सेवा का मौका मिला है।यह मेरे लिए गर्व की बात है। तथा भगवान से यही प्रार्थना करती हुं कि इस कोरोनावायरस रूपी जंग में हमारी जीत हो।
डॉ. पुखराज के पिता कानालाल ने बताया कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है। आज इस विपदा की घड़ी में वो देश के काम आ रहा है। उनका कहना है कि जिस तरह किसान देश को अन्न देते है वेसे ही डॉक्टर मरीज को नया जीवन देते हैं।
गांव अमोदिया के किसान पुत्र डॉ. अशोक लछेटा भी कोरोना संक्रमित क्षेत्र में लोगो के उपचार में जुटे हैं। डॉ. अशोक लछेटा ने बताया कि कोरोना संक्रमित क्षेत्र से जैसे ही किसी के उपचार हेतु खबर आती है। वेसे ही हम तुरन्त उन्हें उपचार देने पहुँचते है। साथ ही लोगो के बीच जाकर उनका हौसला भी बढ़ाते हैं। यहाँ प्रशासन भी हम डॉक्टरो की हर जरूरत का ध्यान रख रहा है। खुद को भाग्यशाली मानता हूँ कि इस विपदा की घड़ी में देश के काम आ रहा हूँ। कोरोना से हमे डर नही लगता क्योकि हमारे जीवन से ज्यादा जरूरी हैं कोरोना से जंग जितना। डॉ. अशोक बताते है कि परिवार से दूर रहकर कार्य कर रहे जब भी घरवालों की याद आती हे तो वीडियो कॉल के माध्यम से उनसे बात कर लेता हूँ।
डॉ. अशोक लछेटा के पिता लक्ष्मण सेठ जोकि समाजसेवी है। और आईजी विद्यापीठ स्कूल राजगढ़ के अध्यक्ष भी हैं। उन्हें इस बात की ख़ुशी है कि बेटा इस घड़ी में देश के काम आ रहा है। हमे हमारे बेटे पर नाज है, आज सब घर पर है। और वह धार में मरीजो की सेवा कर रहा यह बात हमे बेहद सुकून देती हैं।
वही सिर्वी समाज के प्रांतीय अध्यक्ष कैलाश मुकाती वीआईपी मनावर ने कहा की सिर्वी समाज के लिए एक गर्व की बात है कि उनके युवा जांबाज डॉक्टर देश में फैली महामारी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मां आई जी की कृपा से जल्द ही सब कुछ ठीक हो जाएगा। कोरोना हारेगा, और हम जीतेंगे!