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   बढती लूटपाट की घटनाओं के बीच खतरे में है आम सीरवी बुजुर्गो की जिंदगी

पाली जिला क्षेत्र : बहुल्तम सीरवी जाती से घिरा यह क्षेत्र पानी की कमी के कारण खेती में अपने कर्म आधारित पहचान के धनि सीरवी जाती के लोगो का प्रमुख निवास स्थान है, कभी बहती नदियों और बरसाती नालो से कीमती फसलो से भरपूर यह क्षेत्र मारवाड़ के कश्मीर की उपाधि से नवाजा जाता था ... किन्तु सरकारी नीतियों की विडम्बना बांधो पर एनिकट, बढ़ते शहरीकरण, अंधाधुंध पानी के दोहन की वजह से आज यहाँ मीलो दूर तक पानी की उपलब्धता ना के बराबर सी हो चली है, ऐसे में इस क्षेत्र के लोगो ने जीवन यापन के लिए दक्षिण राज्यों में व्यापार हेतु पलायन किया .. विगत तीन दशक से अधिक समय में अपनी व्यापारिक कुशलता के जरिये सीरवी जाती के सदस्यों ने खूब धन अर्जित किया किन्तु मारवाड़ में अपनी पत्रक संपत्ति के लिए बुजुर्ग माता पिता को बिना किसी आवश्यक शुरक्षा के अकेला छोड़ रखा है, सीरवी जाती में सामजिक और सामुदायिक केंद्र की तर्ज पर प्रत्येक गाँव में बढेर का निर्माण कर रखा है जहा त्यौहार और आड़े दिन समाज के लोग इकट्ठे होकर एकदूसरे से मिलते जुलते रहते है और सामजिक पंचायती भी करते है .... पाली जिले के इन पानी रहित इलाको में स्थित सुने पड़े बेरो पर अकेले रह रहे प्रत्येक दंपत्ति के पास शरीर पर पहने जा सकने वाले गहनों की ताक में जुटे लुटेरो के लिए लूटना बहुत ही सरल साधन बन चूका है, विगत कुछ वर्षो से लगातार लुट की वारदाते तो बढती जा ही रही है अपितु इस लुट की वारदातों में निर्दोष बुजुर्ग अपनी जान से अहथ धो बैठते है, समाज का एक अहम् चिन्तक वर्ग इस हेतु बार बार समाज के दक्षिण में रहने वाले धनाढ्य कारोबारियों से निवेदन कर चूका है की अपने अपने गाँवों की इन बढेरो को सौर उर्जा और इन्वर्टर से 24 घंटे बिजली की आपूर्ति करवा कर सी सी टी वी कमरों का कण्ट्रोल रम बनवा दिए जाए ... ताकि उसके कैमरे सम्पूर्ण क्षेत्र में निगरानी रख सके .. किसी भी घटना के होने पर अज्ञात लुटेरो की पहचान हो सके l धीरे धीरे चिन्तक सामजिक विचारको की इस सामजिक चिंता पर असर हो रहा है कुछ गाँवों में यह प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है ..देखते है की अपने माता पिता की और बुजुर्गो की सुरक्षा के लिए धनाढ्य वर्ग कितना संवेदनशील है l

Posted By जितेन्द्र सिंह राठौड़ बिलाड़ा on 26 Ma